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पांच वर्ष पूर्व हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास

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पांच वर्ष पूर्व हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास
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- 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया
- जनपद मुख्यालय के निकट दवा व्यवसायी की गोली मारकर की गई थी हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जनपद मुख्यालय के निकट पांच वर्ष पूर्व दुकान से घर लौटते समय एक दवा व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया। तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 50-50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। वहीं, एक आरोपी साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त हो गया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी उपेंद्र कुमार पाठक व वादी मुकदमा की ओर से सुनील कुमार तिवारी एडवोकेट ने न्यायालय के समक्ष 15 गवाहों को पेश किया। उन्होंने बताया कि कसया थाना क्षेत्र के सुगही तिवारी निवासी ब्रजेश तिवारी की रविन्द्रनगर धूस पर मेडिकल स्टोर की दुकान थी। दो अक्तूबर 2017 को रात्रि नौ बजे दुकान बंदकर अपने पडरौना स्थित आवास पर बाइक से जा रहे थे। वह एक बाइक एजेंसी के पहले पुलिया के पास पहुंचे थे कि पीछे से बाइक सवार दो अज्ञात लोगों ने गाड़ी रोक दिया। वहां ओवरटेक कर दाहिने साइड में पीछे की तरफ कमर में गोली मार दिए। आगे बढ़कर पुन: गाड़ी मोड़कर दूसरी गोली मारना चाहे कि बृजेश तिवारी गाड़ी से उतर कर पीछे मुड़कर भागे। कुछ दूर चलकर सड़क पर गिर पड़े। वहीं, बाइकसवार पडरौना की तरफ भाग गए। लोग बृजेश तिवारी को जिला अस्पताल रविन्द्रनगर ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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मृतक की पत्नी सरिता तिवारी के प्रार्थना पत्र पर पडरौना कोतवाली में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की। उसके बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कर चार व्यक्तियों मंतोष गोड़ निवासी भिसवां सरकारी कोतवाली पडरौना, विजय जायसवाल निवासी बेलभद्र छपरा थाना कप्तानगंज, रूपक राय उर्फ रूपचंद्र राय निवासी भिसवा सरकारी कोतवाली पडरौना तथा जितेंद्र यादव निवासी सांउखोर थाना बेलवाघाट जिला गोरखपुर के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विजय जायसवाल से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल व कारतूस भी बरामद हुआ। बुधवार को इस मुकदमे की सुनवाई हुई।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कृष्ण कुमार पांडेय ने बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नं 3 के न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु के समक्ष 15 गवाहों ने घटना को साबित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से खुद सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कृष्ण कुमार पांडेय व दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके बाद न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों व बहस सुनने के बाद मंतोष गोड, विजय जायसवाल व जितेन्द्र यादव को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास तथा विजय जासवाल को दो वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं सह अभियुक्त रूपक राय उर्फ रूपचंद्र राय को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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