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यूपी: शिकारियों की जंजीर में फंसा तेंदुआ, आठ घंटे की मशक्कत के बाद निकला बाहर

Sat, 07 Nov 2020 08:31 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
महराजगंज जिले के सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल रेंज अंतर्गत करमहिया-गुलरभार के बीच स्थित गंडक पुल के नीचे बेंत की झाड़ी में गुरुवार की रात शिकारियों की जंजीर में फंसे तेंदुआ को काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
शुक्रवार की सुबह टहलने निकले कुछ लोगों की नजर जंजीर में फंसे तेंदुए पर पड़ी। तेंदुएं को देखकर लोग अवाक रह गए। उसके बाद लोगों ने वनकर्मियों को जानकारी दी। जंजीर में फंसा तेंदुआ भूख-प्यास के बीच करीब आठ घंटों तक तड़पता रहा।
 
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
डीएफओ के नेतृत्व में मौके पर पहुंची वनकर्मियों की टीम ने घंटों मशक्कत के बाद तेंदुए को बाहर निकालकर पकड़ने में सफलता पाई। तेंदुए को निचलौल रेंज परिसर लाया। वहां पर डॉ. योगेश कुमार व संतोष जायसवाल ने तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया।

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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
मिश्रवलिया गांव के टोला गुलरभार के लोगों ने बताया कि शुक्रवार की सुबह टहलते हुए निकले लोगाें की नजर पुल से नीचे बेंत की झाड़ियों में जंजीर से फंसे तेदुएं पर पड़ी। उसकी सूचना पर सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पुष्प कुमार कांधला, एसडीओ निचलौल घनश्याम राय, एसडीओ सदर चंदेश्वर सिंह, लक्ष्मीपुर एसडीओ संजय मल्ल, रेंजर दयाशंकर तिवारी, उत्तरी चौक के रेंजर मोहन सिंह, वन सुरक्षा टीम के कासिम अली, राजेश यादव, उपनिरीक्षक ध्रुव नारायण मौर्य मौके पर पहुंचे और तेंदुए को पकड़ने के लिए कोशिशें शुरू कीं।
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MaharajGanj news - फोटो : अमर उजाला।
डीएफओ में बताया कि करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को सुरक्षित पकड़ लिया गया है। उच्चाधिकारियों से वार्ता के बाद उसे पुन: जंगल में छोड़ दिया जाएगा। तेंदुए के आक्रामक रुख को देखते हुए वन विभाग व पुलिस के कर्मियों ने काफी सतर्कता बरती। भीड़ के चलते थोड़ी परेशानी हुई।

निचलौल रेंजर दयाशंकर तिवारी का कहना है कि तेंदुआ भोजन की तलाश में जंगल से गांव की ओर रूख करता है। गन्ने के खेत में तेंदुआ रहना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि गन्ने के खेत एवं आस पास छोटे जीव आसानी से मिल जाते हैं। जिससे उसकी भोजन की जरूरत पूरी हो जाती है।

जंगल में मानव दखल कम करने की जरूरत है। तेंदुआ अगर भूखा नहीं रहता तो आक्रामक नहीं होता है। तेंदुए बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव है और इनकी एकाग्रता तो लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली इन्हें एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घण्टे की रफ़्तार से दौड़ सकते हैं।
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