श्रमिक स्पेशल से आने वाले अप्रवासी मजदूर और उनके परिवार वाले अभी घर पहुंचे नहीं, कि उन्हें वापस बुलाने की सिफारिश शुरू हो गई हैं। गोरखपुर जंक्शन पर आए कुछ श्रमिकों के पास फोन आए।
ठेकेदारों ने बकाया देने के साथ एडवांस का भी लालच दिया। लेकिन लॉकडाउन में जिल्लत झेल चुके श्रमिकों ने जाने से इनकार कर दिया है। उनका कहना था कि हमें दोगुना पारिश्रमिक देंगे तब पर भी नहीं जाऊंगा। गांव में ही रोजी-रोटी की तलाश करुंगा।
कुशीनगर के रहने वाले अल्ताफ अंसारी ने बताया कि पंजाब में पेंट-पालिस कराने वाले ठेकेदार का रास्ते में ही फोन आया था। मैंने मना कर दिया। जब वहां थे, कोई मदद को नहीं आई। हमारा गांव ही सबसे अच्छा है। अब यहीं कोई रोजगार ढ़ूढेंगे।
वहीं देवरिया के रहने वाले अनंत कुमार ने बताया कि चंडीगढ़ में भूखे-प्यासे जिस तरह से हमने समय गुजारा हैं, ताउम्र नहीं भूलेंगे। गनीमत थी कि ट्रेन मिल गई और अब गांव जा रहे हैं। साथी ने फोन किया था कि फैक्ट्री चलने वाली है, बुला रहे हैं। लेकिन हमने मना कर दिया।