कुशीनगर को दुनिया के देशों से जोड़ने और यहां भगवान बुद्ध से जुड़ीं वस्तुओं को दिखाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाया गया है। इसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्तूबर 2021 को लोकार्पण किया था। एयरपोर्ट के लोकार्पण में श्रीलंका के एक विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल ने भी शिरकत की थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से अभी घरेलू उड़ानें ही जारी हैं, लेकिन संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी आरंभ हो सकती हैं। एयरपोर्ट को अत्याधुनिक तकनीक व सुविधाओं से लैस करने का काम तेजी से चल रहा है।
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ढा़ई हजार साल पुराने जिन खास स्थलों को दिखाने के लिए यह सारी कवायद चल रही है। वे स्थल ही खतरे में हैं। बारिश शुरू होते ही मुख्य मंदिर के उत्तर तरफ स्थित छोटे-छोटे प्राचीन स्तूपों के अवशेष पानी में डूब जाते हैं। इसके अलावा दूसरे सबसे महत्वपूर्ण स्थान रामाभार स्तूप के बगल में ही पानी भरने के चलते कई अवशेष डूबे रहते हैं।
वाराणसी सारनाथ मंडल अधीक्षक पुरातत्व अविनाश मोहंती ने कहा कि मौजूदा समय में उत्खनित अवशेषों को जलभराव से बचाने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं हो पाया है। पानी भरने पर पंपिंग सेट से बारिश का पानी बाहर निकाला जाता है। फिलहाल, इस समस्या से विभागीय उच्चाधिकारी अवगत हैं। कोशिश चल रही है। कुछ अड़चनों के कारण धरातल पर नहीं उतर पा रहा। उत्खनित धरोहरों व अवशेषों को जलभराव से बचाने का मुद्दा विभाग का आंतरिक मामला है। उसे बताया नहीं जा सकता। उपाय होगा तो वह खुद दिखेगा। उत्खनित अवशेषों में जलभराव होने की प्रमुख वजह सड़क की ऊंचाई है।
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गोरखपुर क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि कुशीनगर पर्यटन व बौद्ध धर्मावलंबियों के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां के उत्खनित अवशेषों को बरसात में जलभराव से बचाने के लिए भारत सरकार के स्वदेश दर्शन योजना में शामिल किया गया था। लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) की अनुमति नहीं मिलने के चलते परियोजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। पर्यटन और पुरातात्विक दोनों दृष्टिकोण से इन्हें जलभराव से बचाकर संरक्षित और सुरक्षित रखना जरूरी है।
ये हैं संक्षिप्त महत्व
- मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर दुनिया के पवित्र बौद्ध मंदिरों में से एक है। मंदिर में भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर लेटी प्रतिमा है। यह प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर से बनी है। इस मंदिर में हर साल पर्यटक और बौद्ध तीर्थ यात्री काफी संख्या में आते हैं।
- मांथा कुंवर मंदिर में भगवान बुद्ध की भू-स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा है। मंदिर के सम्मुख उत्खनित धरोहर व अवशेष खुले में पड़े हैं। इनकी बौद्ध भिक्षु व उपासक व उपासिकाएं पूजा-अर्चना करती हैं।
- रामाभार स्तूप पवित्र बौद्ध स्थल है। बौद्ध धर्म के अनुयायी परिक्रमा करते हैं। कैंडल आदि जलाकर बौद्ध परंपरा के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना भी करते हैं। ध्यान भी करते हैं।