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Ram Mandir: कार सेवक की कहानी, 'आंखों के सामने लगी थी कोठारी बंधुओं को गोली, मैं बच गया'

Thu, 18 Jan 2024 11:33 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गगहा।

सार

डॉ. रणजीत सिंह आज भी सिहर उठते हैं, जब यह कहते हैं कि उनके सामने दोनों कोठारी बंधुओं को गोली लगी थी। कहते हैं कि 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा लहराने के बाद हम सब दो नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे। जब पुलिस ने गोली चलाई तो लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए।
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कार सेवक रणजीत सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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राम जन्मभूमि में विवादित ढांचे पर भगवा झंडा फहराने वालों में कौड़ीराम ब्लाॅक अंतर्गत गांव गंभीरपुर के भी एक कारसेवक थे। उनका नाम डॉ. रणजीत सिंह है। उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 को मिला कार सेवा परिचय पत्र आज भी सहेज कर रखा है। डॉ. रणजीत सिंह बताते हैं कि वर्ष 1990 में विवादित ढांचे पर चढ़कर भगवा झंडा फहराया। इस दौरान कोठारी बंधु साथ थे। फिर 1992 में विवादित ढांचे को लाखों कारसेवकों ने ध्वस्त कर वहां रामलला को विराजमान करा दिया।

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डॉ. रणजीत सिंह कहते हैं कि आज भी वह दिन याद है। 25 अक्टूबर वर्ष 1990 को गांव के बड़े बुजुर्गों ने चंदा देकर कारसेवा के लिए टीका लगाकर विदा किया। उनके साथ गांव के ही अजय सिंह, सुरेश सिंह, अभिनय सिंह, सुनील सिंह समेत 20 युवक 25 अक्तूबर को गांव से निकले।

रात में साइकिल चलाते और दिन में किसी न किसी जगह छुपे रहते। गांव के पुराने संघी राम निधि सिंह जानकी घाट पर स्थित एक मंदिर में रहते थे। उस मंदिर पर जब हम सब पहुंचे और उनके पैर छुए तो राम निधि सिंह हम सभी को पकड़कर रोने लगे। कहने लगे यहां पहुंचने में कड़ी यातनाएं सहनी पड़ीं होंगी।
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डॉ. रणजीत सिंह आज भी सिहर उठते हैं, जब यह कहते हैं कि उनके सामने दोनों कोठारी बंधुओं को गोली लगी थी। कहते हैं कि 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा लहराने के बाद हम सब दो नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे। जब पुलिस ने गोली चलाई तो लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए।

शरद कोठारी और रामकुमार कोठारी दोनों भाई भी साथ थे, लेकिन थोड़ी देर बाद जब हम सब बाहर निकले तो पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। पहले एक भाई को गोली लगी तो दूसरे ने उसे आकर संभाला। तब तक पुलिस ने दूसरे भाई को भी गोली मार दी थी। मुश्किल से 50 मीटर की दूरी रही होगी, सामने गोलियां चल रहीं थीं, लेकिन जय श्रीराम का उद्घोष हर तरफ सुनाई दे रहा था।
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