भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान करते लोग। (फाइल फोटो)
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भाद्रपद पूर्णिमा 20 सितंबर सोमवार को है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्र माह में आने वाली पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहते हैं। पूर्णिमा की तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है।
उमा-महेश्वर व्रत का महत्व
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार भविष्यपुराण में वर्णित है कि उमा महेश्वर व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है, लेकिन नारदपुराण के अनुसार यह व्रत भाद्रपद की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत के प्रभाव से बुद्धिमान संतान, और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
भाद्रपद पूर्णिमा व्रत पूजा विधि
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, पूर्णिमा के दिन ब्रहम मुहूर्त में उठकर स्नादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद विधि विधान से भगवान सत्यनारायण की पूजा करें और उन्हें नैवेद्य व फल-फूल अर्पित करें। पूजन के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनेंनी। इसके बाद पंचामृत और चूरमे का प्रसाद वितरित करें। इस दिन किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान अवश्य करें।