पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को प्रात:काल स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर अपनी शक्ति के अनुसार सोने, चांदी, पीतल अथवा गोबर से निर्मित गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणेशजी का षोडशोपचार सविधि करें। गणेश जी की मूर्ति पर सिंदूर अवश्य चढ़ाएं। साथ ही मोदक का भोग लगाएं। अंत में आरती कर पूजन संपन्न करें।
गणेश चतुर्थी की तैयारियां में जुटे लोग
गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। पंडालों में 10 दिनों तक भगवान गणेश की प्रतिमा रख विधि-विधान से पूजर अर्चना की जाती है। अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा का विसर्जन होता है। गणेश चतुर्थी की तैयारियों में लोग जुटे हुए हैं। कोरोना के कारण पिछले साल के बाद इस साल भी शहर में कहीं भी भव्य पंडाल नहीं लगाए जा रहे हैं। घरों और दुकानों में ही भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा रख समितियां विधि-विधान से पूजन अर्चन करेंगी। मूर्तिकार भी मांग के मुताबिक एक फीट से पांच फीट तक की ही गणेश प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं।