कुशीनगर तुर्कपट्टी स्थित सूर्यमंदिर में स्थापित प्रतिमा गुप्तकालीन है। नीलम धातु से निर्मित इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए भारत ही नहीं पड़ोसी देश नेपाल ,म्यांमार और श्रीलंका से भी पर्यटक आते हैं। प्रत्येक वर्ष नवंबर में आयोजित होने वाला सूर्य महोत्सव लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है।
तुर्कपट्टी महुअवा गांव निवासी विश्वनाथ शर्मा ने 30 जुलाई 1981 की रात में स्वप्न देखा कि घर के बगल की जमीन में सूर्य प्रतिमा है। अगले दिन सुबह उन्होंने यह बात गांव के केडी शाही व मथुरा शाही को बताई।
स्वप्न में बताई गई जगह पर खुदाई शुरू कराई गई तो वहां विभिन्न देवी देवताओं के मूर्तियों के साथ सात घोड़ों पर सवार,चतुर्भुज रूप में एक सूर्य प्रतिमा मिली। खबर पूरे देश में फैली तो तत्कालीन इतिहासकार चन्द्रमौलि शुक्ल, शैल चतुर्वेदी, पीके लहरी, महावीर प्रसाद कंदोई सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण टीम भी पहुंच गई।