राजनीति से संन्यास ले चुके चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि जब केंद्र सरकार एमएसपी पर राजी है तो उसे कानूनी जामा पहनाने के लिए चर्चा होनी चाहिए। इसमें किसी तरह की दिक्कत भी नहीं आएगी। चावल और गेहूं को आवश्यक वस्तु सूची से बाहर से किया जाना भी उचित नहीं है।
केएन गोविंदाचार्य स्थानीय आरोग्यधाम में बीते एक माह से स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। वह शनिवार को शहर के कारोबारी प्रदीप बंका के आवास पर गए और वहीं मीडिया कर्मियों से बात भी की है।
गोविंदाचार्य ने कहा कि जब इन कृषि कानूनों का प्रारंभिक विरोध शुरू हुआ था तब ही उन्होंने बातचीत कर हल निकालने का आग्रह किया था। प्रश्न मुद्दे का है, कृषि बिल वापसी या उस पर चर्चा करने का नहीं। जरूरत इस पर चर्चा करने की है कि कानून में क्या हो और क्या न हो।
लोकतंत्र में किसी की नीयत पर शक नहीं करना चाहिए। न सरकार को किसानों पर और न ही किसान संगठनों को सरकार पर। इससे पूर्वाग्रहों से विपरीत अर्थ निकाले जाने की आशंकाएं रहती है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल व कार्यशैली के सवाल पर उन्होंने कहा कि बहुत सी चीजें जानी और समझी होती हैं, लेकिन उन पर बोलना जरूरी नहीं होता है। समाज हमेशा आगे होता है और सत्ता उसके पीछे। वर्तमान में सत्ता भले ही आगे दिख रही है, लेकिन देश को समाज ही चला रहा है। कोई भी देश धर्मसत्ता, समाजसत्ता और सांस्कृतिक पूंजी से चलता है।
देश के आर्थिक विकास के लिए उन्होंने भू-पर्यावरणीय कृषि प्रक्षेत्र मॉडल बनाए जाने जोर दिया। इसके लिए सरकार को देश के हर गांव के सामाजिक, मानव संसाधन और संसाधन एटलस को बनाना चाहिए। किसानों की उन्नति के लिए देश को लो कास्ट, लो कैपिटल मल्टी क्रॉप कृषि की जरूरत बताई। इस मौके पर दीपक बंका, संजय शर्मा, सहित अन्य लोग मौजूद रहे।