महराजगंज। अरहर में खेसारी की दाल मिलाकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। गोरखपुर से मिलावटी दाल मंगाई जा रही है। प्रत्येक दिन करीब 350 टन दाल जिले में खपत हो रही है। खेसारी की दाल 55 से 60 रुपये प्रति किलो मिल जाती है। इसे अरहर की दाल में मिलाकर धंधेबाज 20 से 25 प्रति किलो मुनाफा कमा रहे हैं। इस तरह से प्रति क्विंटल 2,500 रुपये का मुनाफा हो रहा है।
जिले में दलहन का 25,000 हेक्टेयर का रकबा है। सबसे अधिक मटर व मसूर की बुआई होती है। अरहर का रकबा महज 400 से 500 हेक्टयर है। औसतन एक हेक्टेयर में 15 से 20 क्विंटल अरहर का उत्पादन होता है। इस तरह से एक सीजन में अरहर 6,000 क्विंटल पैदा होता है। जिले में उत्पादन क्षमता कम होने के कारण बाहर से ही दाल मंगाना पड़ता है।
इसमें मिलावट की आशंका अधिक रहती है। इसका फायदा धंधेबाज उठाते हैं। मिलावट के इस खेल में शुद्धता से कारोबार करने में कारोबारी परेशान रहते हैं क्योंकि मिलावट खोर उनसे सस्ती दर पर दाल बेचते हैं। ग्राहक इस खेल को समझ नहीं पाते हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य देश से मिलावटी दाल उत्तर प्रदेश में आ रही है। इसकी पहचान आसानी से नहीं की जा सकती है। दाल को शुद्ध समझ कर लोग खरीदते हैं लेकिन असल में उसमें मिलावट होती है।
डॉक्टरों के अनुसार, खेसारी, सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। महराजगंज के ज्यादातर कारोबारी गोरखपुर मंडी से खरीदारी करते हैं। गोरखपुर में मिलावटी दाल बिक्री होने की बात सामने आई है। आशंका है कि महराजगंज की मंडी में भी मिलावट वाली दाल आ चुकी है। बाजार में 100 रुपये लेकर 120 रुपये तक प्रति किलो की अरहर की दाल उपलब्ध है। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि दाल को खरीदते समय बारीकी से देखना चाहिए।
हालांकि मिलावटी दाल की बिक्री रोकने के लिए अब व्यापारी खुद सतर्क हो रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ धंधेबाजों की वजह से पूरे व्यापार को लोग शक की निगाह से देखने लगेंगे।