वहीं, पंडित विकास मालवीय के अनुसार अप्रैल व मई में ही लगन है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 को लगन है। इसमें ज्यादा तेज लगन अक्षय तृतीया के दिन है, जो ज्यादा शुभ माना जा रहा है। वहीं मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14 को लगन है। इसके बाद 17 अप्रैल से अधिकमास शुरू होने से एक बार फिर एक महीने के लिए सहालग पर विराम लग जाएगा।
सहालग 15 अप्रैल से शुरू हो जाएगा। इस दिन से एक महीने तक बैंड-बाजे की धुन पर बराती थिरकेंगे। मेष संक्रांति व (सतुआन) होने से खरमास का समापन भी हो जाएगा।
विज्ञापन
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र के अनुसार, विगत 15 मार्च से सहालग पर विराम लगा था। मंगलवार को मेष संक्रांति (सूर्य के मीन से मेष राशि में पहुंचने पर) व सतुआन के कारण खरमास का समापन हो जाएगा। इससे अगले दिन बुधवार से लगन शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस दिन लोग सतुआ का सेवन भी करते हैं। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है।
वहीं, पंडित विकास मालवीय के अनुसार अप्रैल व मई में ही लगन है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29 को लगन है। इसमें ज्यादा तेज लगन अक्षय तृतीया के दिन है, जो ज्यादा शुभ माना जा रहा है। वहीं मई में 1, 3, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14 को लगन है। इसके बाद 17 अप्रैल से अधिकमास शुरू होने से एक बार फिर एक महीने के लिए सहालग पर विराम लग जाएगा।