इसलिए नहीं होते मांगलिक कार्य
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं। इन राशियों पर सूर्य की स्थिति रहती है। प्रत्येक एक मास तक एक राशि में रहने के बाद सूर्य दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इसमें दो संक्रांतियों पर सूर्य बृहस्पति की राशि धनु और मीन राशि में होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य की स्थिति बृहस्पति की राशि में होती है तो बृहस्पति का तेज समाप्त हो जाता है। मांगलिक कार्यों के लिए तीन ग्रहों के बल की आवश्यकता होती है।
ये हैं सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति। इनमें से किसी भी ग्रह के बल में न्यूनता होने से मांगलिक कार्य अवरुद्ध हो जाते हैं। खरमास के महीने में बृहस्पति के बलहीन होने से शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसी प्रकार जब महीने में सूर्य चंद्रमा के अत्यंत निकट आ जाता है तो उस समय भी शुभ मुहूर्त का अभाव रहता है।
खरमास में न करें ये कार्य
पंडित अवधेश मिश्रा ने बताया कि वधू प्रवेश, वर वरण, कन्या वरण, बरच्छा, विवाह से संबंधित समस्त कार्य, मुंडन, यज्ञोपवीत, दीक्षा ग्रहण, गृहप्रवेश, गृहारंभ, कर्णवेध, प्रथम बार तीर्थ पर गमन, देव स्थापन, देवालय का आरंभ, मूर्ति स्थापन, किसी विशिष्ट यज्ञ का आरंभ, कामना परक कर्म का आरंभ, व्रतारंभ, व्रत का उद्यापन आदि कार्य खरमास में नहीं किए जाते हैं।
भगवान सूर्य एवं श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी
पंडित अरविंद गिरि कहते हैं कि खरमास में सूर्य की गति मंद पड़ने लगती है। इसलिए इस मास में सूर्यदेव और श्रीकृष्ण की उपासना से विशेष लाभ प्राप्त होता है। खरमास में पवित्र नदियों में स्नान से कई रोगों से मुक्ति मिलती है। इस मास में पड़ने वाली एकादशी व्रत करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त नवमी तिथि को कन्याओं को भोजन कराकर उपहार देने से भी बाधाएं दूर होती हैं।