उन्होंने बताया कि गौतम की चार पीढ़ियों ने लगातार देश की सेवा की है। गौतम जीआरडी के पूर्व कमांडेंट पीएस गुरुंग और पुष्पलता के एकलौते बेटे थे। देहरादून में 23 अगस्त 1973 को जन्मे गौतम एमबीए के बाद सेना में भर्ती हुए। पिता की बटालियन 3/4 गोरखा रायफल्स से 1997 में कमीशन लिया।
पहली तैनाती जम्मू कश्मीर में मिली। 4 अगस्त 1998 को जंग के दौरान साथियों को बचाने में घायल हुए और 5 अगस्त को उन्हें शहादत हासिल हुई। उनकी बहादुरी को देखते हुए वर्ष 2000 में उनके अदम्य शौर्य और साहस को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें सेना मेडल से नवाजा।
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गौतम गुरुंग की छोटी बहन मीनाक्षी रक्षाबंधन आने पर तड़प उठती हैं। उन्होंने जिस शाम भाई को भेजने के लिए राखी खरीदी थी, उसी शाम भाई के शहीद होने की खबर आई। वो राखी आज भी मीनाक्षी ने संभाल कर रखी है।
भारत नेपाल मैत्री समाज के प्रयास से कूड़ाघाट तिराहे पर गौतम गुरुंग की प्रतिमा लगाई है। अब यह शहीद गौतम गुरुंग तिराहे के नाम से जाना जाता है।