इसके अलावा जांच में सामने आया कि कसया खंड के तत्कालीन एक्सईएन ने जनवरी-20 में एक कर्मचारी की नियुक्त कर दी। इसके बाद वेतन जारी करने को पत्रावली जोन के उपमुख्य लेखाधिकारी कार्यालय में पहुंची। उपमुख्य लेखाधिकारी ने पत्रावली का अवलोकन कर फाइल आगे बढ़ा दी।
इसके बाद सभी नवनियुक्त कर्मचारियों का वेतन बनने लगा। चार श्रमिकों की नियुक्त के बाद कर्मचारी संगठन ने मामले की शिकायत शक्तिभवन से लगायत पूर्वांचल एमडी तक की। मामले का संज्ञान लेकर पूर्वांचल एमडी ने जोन के मुख्य अभियंता को टीम गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए।
सीई ने तीन सदस्यीय कमेटी से कराई जांच
अक्तूबर 2021 में जोन के मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिए दो अभियंताओं व एक लेखाकार को जिम्मेदारी सौंपी थी। टीम में राजीव चतुर्वेदी, एक्सईएन परीक्षण खंड देवरिया, प्रवीण कुमार चौबे, एक्सईएन परीक्षण खंड कुशीनगर व संजय आर्या लेखाकार माध्यमिक कार्यखंड शामिल रहे। टीम ने सात माह तक मामले की जांच की। इसके बाद 23 मई 2022 को अपनी रिपोर्ट मुख्य अभियंता को सौंपी। इसी पत्र के बाद मुख्य अभियंता ने पड़रौना व चौरीचौरा एक्सईएन को पत्र लिख वैधानिक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
गोरखपुर जोन मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि चार श्रमिकों को कूटरचित दस्तावेज के सहारे फर्जी नौकरी हासिल करने का दोषी, जांच टीम ने पाया है। जोन के चौरीचौरा और पडरौना वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया है कि उक्त दोषियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराएं। इनको दिए गए वेतन से रिकवरी करवा कर निगम को सूचित करें।