अस्पताल पर सील लगाते कर्मचारी। (फाइल)
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गोरखपुर जिले के उरुवा बाजार इलाके में केबी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद से अवैध अस्पतालों की जांच शुरू कर दी गई। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच शुरू की तो कई नर्सिंग होम और दवा के दुकान वाले ताला लटका कर फरार हो गए। इस दौरान कमियां मिलने पर दो अस्पताल सील कर दिए। विभाग की टीम ने बंद मिली 14 क्लीनिकों व अस्पतालों को नोटिस जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक उरुवा में प्रसूता की मौत में नर्सिंग होम की लापरवाही सामने आई थी। जांच में पता चला कि अस्पताल पंजीकृत नहीं है। जिसके बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के दामन पर अवैध अस्पताल के संचालन का दाग लगा। बुधवार को सीएमओ के निर्देश पर एडिशनल सीएमओ डॉ एनएल कुशवाहा, डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल कुमार सिंह की अगुवाई में टीम उरुवा पहुंची। टीम में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ जेपी तिवारी और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी वीके बर्नवाल भी मौजूद रहे। टीम ने उरुवा, माल्हनपार और धुरियापार में जांच की।
माल्हनपार में डॉ सचिन वर्मा के नाम से क्लीनिक मिली। यहां पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कर्मचारी धड़ल्ले से दवा बांट रहे थे। डॉक्टर के इंतजार में कुछ मरीज भी मिले। यह क्लीनिक अपंजीकृत थी। इसे सील कर दिया गया। उरुवा में अपंजीकृत मिले कुसुमावती हॉस्पिटल को सील कर दिया गया।
मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित
कस्बे के केबी अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले की जांच के लिए सीएमओ ने तीन सदस्यों की टीम गठित कर दी है। बुधवार को टीम ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। प्रसूता की सास से लिखित बयान के साथ ही घटनाक्रम की जानकारी ली। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से ही आरोपी डॉक्टर मनीष पांडेय फरार है।