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Exclusive: अंतरराष्ट्रीय गोल्फ खिलाड़ी दीक्षा बोलीं, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, संघर्ष से न घबराएं

Mon, 03 Apr 2023 02:26 PM IST
vivek shukla प्रीति कश्यप, गोरखपुर।

सार

टोक्यो ओलंपिक्स के सफर को याद करते हुए दीक्षा ने कहा जब मेरे पापा ने मुझे बताया कि ओलंपिक्स में मेरा चयन हुआ है तो मैं बिल्कुल आश्चर्यचकित रह गई थी। समय कम था और जिम्मेदारी बड़ी थी। यह मेरे लिए अविस्मरणीय क्षण था।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता, गोल्फ खिलाड़ी दीक्षा डागर। - फोटो : अमर उजाला।
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खेलोगे-कूदोगे,बनोगे नवाब...यह कहना है अंतरराष्ट्रीय गोल्फ प्लेयर दीक्षा डागर का। महज 22 साल की उम्र में ही दीक्षा टोक्यो ओलंपिक्स,एशियन गेम्स,एशिया पैसिफिक जैसे सौ से अधिक अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। दीक्षा को बचपन से ही खेल के प्रति रूचि रही और महज छह साल की उम्र से ही वो खेल से जुड़ गईं। पढ़ाई से ज्यादा दीक्षा ने खेल को समय दिया इस नाते वो मानती हैं कि खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे नवाब।

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दीक्षा ने टेनिस, तैराकी, शूटिंग, घुड़सवारी, टेबल टेनिस भी खेला। लेकिन, गोल्फ के लिए एक अलग सी दीवानगी पैदा हो गई और फिर उन्होंने तय किया कि इसमें ही वह अपना करियर बनाएंगी। दीक्षा के पिता आर्मी में हैं जिस नाते उन्हें शुरू से खेल-कूद का वातावरण मिला।

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दीक्षा ने कहा कि मुझे अपने मम्मी-पापा का पूरा सहयोग मिला। पापा ने कहा कि तुम पढ़ाई की चिंता न करो, प्रैक्टिस पर फोकस करो। एक गोल्फ प्लेयर होने के नाते पढ़ाई के साथ-साथ गोल्फ को लेकर चलना आसान नहीं था। मैंने सिर्फ इंटर तक की पढ़ाई की उसके बाद मेरा पूरा ध्यान गोल्फ पर था।

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दीक्षा डागर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने शहर में आई हुई थीं। टोक्यो ओलंपिक्स के सफर को याद करते हुए दीक्षा ने कहा जब मेरे पापा ने मुझे बताया कि ओलंपिक्स में मेरा चयन हुआ है तो मैं बिल्कुल आश्चर्यचकित रह गई थी। समय कम था और जिम्मेदारी बड़ी थी। यह मेरे लिए अविस्मरणीय क्षण था।

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खेल के क्षेत्र में अपना करियर देख रहे युवाओं के लिए दीक्षा ने कहा कि मेरा मानना है कि जिस भी क्षेत्र में युवाओं की रूचि हो वो उसमें अपना करियर बनाना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है इसलिए मेहनत करने से कभी न कतराएं। हार-जीत जिंदगी के दो पहलू हैं, इस नाते जीवन में संघर्ष से न घबराएं। अगर आप स्पोर्टस में अपना करियर तराश रहे हैं तो उसके लिए दिल से पागलपन होना चाहिए, तभी तय मंजिल पर आप पहुंचेंगे।

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दीक्षा ने कहा कि बीते कुछ सालों से खेल के प्रति लोगों में बेहद जागरूकता आई है। पहले अभिभवक चाहते थे कि उनके बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, अफसर, आदि बने। लेकिन, अब यह बदलाव दिख रहा है कि वे बच्चों को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के मुकाबले अमेरिका-यूरोप जैसे देशों में गोल्फ की लोकप्रियता ज्यादा है। यह दुर्भाग्य की बात है कि अभी भी भारत में गोल्फ को लेकर इतनी जागरूकता नहीं है। इसकी मुख्य वजह गोल्फ का महंगा होना और जागरूकता की कमी है। इस महीने में होने वाले एशियन गेम्स ट्रायल में दीक्षा भाग लेने वाली हैं और मई में फ्रांस में होने वाली जबरा लेडिज ओपन में भी वह अपना प्रदर्शन देंगी।

 
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