आज विश्व महिला दिवस के अवसर पर गोरखपुर शहर की ऐसी महिलाओं से रूबरू कराएंगे जो रुढ़ियों की बंदिशों को तोड़ आज अपना मुकाम खुद तय कर रही हैं। आज का ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है।
'क्यों कहती है दुनिया नारी कमजोर है, जग को बताओ नारी के हाथों में सृष्टि की डोर है।' आज की नारी न तो अबला है और न ही कमजोर है। तमाम सामाजिक रुकावटों व बेड़ियों को तोड़ समाज में महिलाएं खुद की मिसाल पेश कर रही हैं।
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महिलाओं के प्रति समाज की सोच भी बदली है। यह बदलाव उन महिलाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति की देन है जिन्होंने अपने हौसलों के बल पर मुश्किलों से लड़कर अपने रास्तों को खुद संवारा है। समाज की उन्नति भी महिलाओं की उन्नति से मापी जाती है।
आज विश्व महिला दिवस के अवसर पर गोरखपुर शहर की ऐसी महिलाओं से रूबरू कराएंगे जो रुढ़ियों की बंदिशों को तोड़ आज अपना मुकाम खुद तय कर रही हैं। आज का ये दिन महिलाओं की उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है।
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संगीता पांडेय
1500 से शुरू किया व्यापार, दे रहीं बहुतों को रोजगार
शहर के झरना टोला निवासी संगीता पांडेय न तो किसी उद्योगपति परिवार से आती हैं और न ही व्यापार के क्षेत्र से पहले कोई नाता। बस जुनून इस कदर चढ़ा कि मुश्किलें भी उन्हें रोक नहीं पायी। चंद पैसों से उन्होंने व्यापार शुरू किया और खुद के दम पर करोड़ों का व्यापार खड़ा किया। कम संसाधनों में छोटे व्यापार को शुरू कर उसे बुलंदियों तक पहुंचाने का जज्बा रखने वाली संगीता पांडे आज महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि व्यापार करने वाले पुरुषों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
इस सफलता तक पहुंचने में कई रुकावटें आईं, पर संगीता ने सबका सामना किया। उनकी इस सफलता और जज्बे के लिए सरकार ने हाल ही में उन्हें 'गोरखपुर रत्न' से सम्मानित किया है। संगीता ने कहा मुख्यमंत्री से सम्मान मिलने के बाद मुझे प्रोत्साहन भी मिला और नए लोग भी मुझसे जुड़ने लगे।
संगीता ने शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और बाद में गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया। पढ़ाई के बाद उनकी शादी हो गई। संगीता ने बताया कि वह इससे संतुष्ट नहीं थी और फिर कुछ करने की ठानी। उन्होंने मिठाई पैकेजिंग के लिए फैंसी डिब्बे तैयार करने का निश्चय किया।
संगीता ने कहा मुझे डिब्बे बनाना किसी ने सिखाया नहीं। खुद बाजार से अलग-अलग तरह के डिब्बों को खरीदा और उसे फाड़कर बनाने का गुर सीखा। संगीता ने व्यापार की शुरुआत 2013 में महज 1500 रुपये से की। शुरुआत में संगीता ऑर्डर देने साइकिल से जाती थीं। पहला ऑर्डर मिला तो संगीता ने 20 डिब्बे तैयार किए।
दुकानदार को ये डिब्बे पसंद आए, उसके बाद उन्हें और अधिक ऑर्डर मिलने लगे। शुरुआती दौर में संगीता ने लोगों के तानों को भी झेला पर वह रूकी नहीं। आज संगीता लगभग डेढ़ सौ महिलाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रही हैं। मौजूदा समय में गोरखपुर समेत 16 जिलों में संगीता अपना व्यवसाय कर रही हैं।
कलावती और चंदा के नाम दर्ज है गोरखपुर में सबसे ज्यादा पुरुष नसबंदी कराने का रिकॉर्ड
जिले में सबसे ज्यादा पुरुष नसबंदी कराने वाली एएनएम कलावती और आशा चंदा चौहान लोगों के बीच जाकर उन्हें परिवार नियोजन के बारे में समझा रही हैं। कलावती के नाम 5 तो वहीं चंदा के नाम 3 पुरुष नसबंदी कराने का रिकॉर्ड दर्ज है। कलावती ने बताया कि पुरुष नसबंदी में सबसे बड़ी बाधा मिथक और भ्रांतियां है। पति की जगह महिला खुद की नसबंदी के लिए तैयार हो जाती हैं।
यही कारण है कि महिला नसबंदी का ग्राफ हमेशा ज्यादा रहता है। आशा कार्यकर्ता चंदा ने बताया कि वह लोगों के बीच जाकर खुद के सुखी छोटे परिवार की नजीर देती हैं। चंदा की कहानी सुनने के बाद समुदाय से भी लोग परिवार नियोजन सेवा से जुड़ने के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं । उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि नसबंदी की सेवा अपनाने से हिचकने वाले पुरुष भी इस सेवा को अपनाकर परिवार को खुशहाल बनाने के लिए आगे आ रहे हैं ।
हेमलता ओझा
शहर की ट्रांसपोर्टनगर निवासी हेमलता गांव के परिदृश्य से निकलकर आज गोरखपुर शहर में हैंडक्राफ्ट का व्यवसाय कर रही हैं। हेमलता अपने साथ साथ 30-40 गरीब परिवार की महिलाओं को रोजगार देकर उनका जीवन संवार रही हैं। साहित्य में रुचि रखने वाली हेमलता को कहानी एवं काव्य लिखने का भी शौक है। वे चार बच्चों की मां भी हैं। कारोबार शुरुआत करने के लिए वह गांव छोड़कर शहर आयीं और किराए के मकान में रहने लगी। हेमलता, हेमदीप सेवा संस्थान नाम से एनजीओ भी चलाती हैं जिससे वे तमाम महिलाओं को सशक्त बनने की नसीहत देती हैं। हेमलता ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्होंने तमाम चुनौतियों का सामना किया। कारोबार शुरू करने के लिए दो लाख का लोन भी लिया। हेमलता ने कहा कि मेहनत पर विश्वास करो, तो सफलता जरूर मिलती है। यही उनका मूल मंत्र भी है। हेमलता को मिशन शक्ति के तहत 'नारी शक्ति' व अन्य मंचों पर भी सम्मानित किया गया है। हेमलता ने कहा कि जब वह अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं को आगे बढ़ते देखती हैं तो उन्हें बहुत खुशी मिलती है और प्रेरणा भी।