संपूर्ण समाधान दिवस में कमिश्नर ने सुनीं फरियाद।
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गोरखपुर जिले में चार महीने से लापता सगी बहनों के मामले में केस न दर्ज करने से नाराज एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने शनिवार को समाधान दिवस के दौरान ही इंस्पेक्टर चौरीचौरा इकरार अहमद समेत चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित अन्य पुलिस कर्मियों में हल्का प्रभारी योगेश यादव, हेड कांसटेबल मनोज यादव और कांसटेबल निशांत शामिल हैं। एसएसपी ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसी का नतीजा रहा कि देर शाम अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज करके मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, चौराचौरा के करमहां गांव की दो नाबालिग लड़कियां 28 मार्च को घर से लापता हो गईं। परिजनों ने खोजबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका। परिजनों ने मामले की सूचना चौरीचौरा पुलिस को दी और तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की लेकिन पुलिस सुनवाई नहीं की थी। नतीजा रहा कि परिजन भटकते रहे और लड़कियों का कुछ पता नहीं चल सका। शनिवार को चौरीचौरा तहसील परिसर में समाधान दिवस का आयोजन किया गया।
डीएम विजय किरन आनंद और एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने एक-एक फरियादियों को सुना और समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसी बीच करमहां गांव के अदालत गुप्ता आए और अपनी अर्जी देकर भावुक हो गए। एसएसपी से कहा कि साहब, चार महीने से दौड़ रहे हैं लेकिन लापता नाबालिग बेटियों का कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस भी सुनवाई नहीं कर रही है। इससे नाराज एसएसपी ने थाना प्रभारी इकरार अहमद से जवाब-तलब किया। पूछा कि अब तक एफआईआर क्यों नहीं लिखी गई? इसका संतोष जनक जवाब थाना प्रभारी नहीं दे सके।
इसके बाद एसएसपी ने समाधान दिवस में ही इंसपेक्टर समेत चार पुलिस कर्मियों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। साथ ही एसएसआई मनोज यादव को थानाध्यक्ष का कार्यभार दे दिया। इस मामले में पीड़ित परिवार का बयान दर्ज किया गया है। मोबाइल नंबरों को जुटाकर छानबीन की जा रही है। कार्यवाहक थानाध्यक्ष का कहना है कि लापता लड़कियों को जल्द ही बरामद करने का प्रयास किया जाएगा।