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देवरिया में हादसा: दरवाजे पर बनी टंकी में डूबने से मासूम की मौत, मचा हड़कंप

Mon, 18 Dec 2023 12:51 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

परिवार और गांव के लोगों के अनुसार, प्रवीण शर्मा अपने नाबदान के पानी की निकासी के लिए प्रधान के घर का महीनों से चक्कर काट रहे थे। लेकिन, उनकी समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। आर्थिक रूप से कमजोर प्रवीण ने थक हार कर किसी तरह अपने दरवाजे पर नाबदान के लिए टंकी बनवाई। लेकिन, रुपए नहीं होने की वजह से वह उस पर स्लैब नहीं लगवा पाए।
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वैष्णवी शर्मा। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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देवरिया जिले के महुआडीह थाना क्षेत्र के घुड़ीपाकड़ गांव में प्रवीण शर्मा के दरवाजे पर बनी पानी की टंकी में रविवार की शाम उनकी मासूम बच्ची खेलने के दौरान गिर गई। इससे वह पानी में डूब गई। साथ खेल रहे बच्चों के शोर मचाने पर घर के लोगों को मासूम के डूबने की जानकारी हुई। उसे बाहर निकाला गया। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस बात की जानकारी होते ही घर में चीख-पुकार मच गई।
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महुआडीह थानाक्षेत्र के घुड़ीपाकड़ गांव के प्रवीण शर्मा स्थानीय रामपुर गौनरिया चौराहा पर गुमटी में सैलून चलाते हैं। रविवार की शाम को उनकी पांच वर्षीय बेटी वैष्णवी शर्मा मोहल्ले के बच्चों के साथ अपने दरवाजे पर खेल रही थी। इसी बीच दरवाजे पर बने अपने नाबदान वाली टंकी में गिर गई।

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उस पर स्लैब नहीं लगा था। बच्चों ने उसे गिरते देख बचाने की कोशिश की पर, वह सफल नहीं हो सके और वैष्णवी डूब गई। बच्चे डर कर वहां से भाग गए। उसी में से एक बच्ची घर जाकर अपनी दादी से यह बात बताई। दादी आनन- फानन प्रवीण शर्मा के घर जाकर बच्ची के गिरने की बात बताई।

उधर, बच्ची को खोज रहे घर के लोगों को डूबने की जानकारी हुई तो उनके होश उड़ गए। टंकी में खोजबीन में मासूम को बाहर निकाला गया। उसे कुशीनगर के हाटा सीएचसी ले जाया गया। वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस बात की जानकारी होते ही घर में चीख - पुकार मच गई। पिता प्रवीण, माता पूजा शर्मा व बड़ा भाई वैभव (7) का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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प्रधान ने बनवा दी होती नाली तो नहीं जाती मासूम की जान
परिवार और गांव के लोगों के अनुसार, प्रवीण शर्मा अपने नाबदान के पानी की निकासी के लिए प्रधान के घर का महीनों से चक्कर काट रहे थे। लेकिन, उनकी समस्या पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। आर्थिक रूप से कमजोर प्रवीण ने थक हार कर किसी तरह अपने दरवाजे पर नाबदान के लिए टंकी बनवाई। लेकिन, रुपए नहीं होने की वजह से वह उस पर स्लैब नहीं लगवा पाए। इसी बीच खेलने के दौरान उनकी बच्ची उसमें गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई।

मासूम की इस तरह मौत से बदहवास मां और पिता सहित गांव के कुछ लोगों का भी कहना है कि गांव के अन्य लोगों की तरह प्रवीण के घर का भी नाबदान की पानी के निकासी की व्यवस्था करा दी गई होती तो शायद वैष्णवी की इस तरह जान नहीं जाती।


 
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