डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने शुक्रवार रात जिला कारागार पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जांच की। उन्होंने निलंबित जेलर, दोनों प्रधान बंदी रक्षकों, दोनों बंदी रक्षकों, जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर के बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि विपिन 18 जुलाई को जेल आने के बाद से ही फरार होने की योजना बना रहा था।
जांच के अनुसार, 28 जुलाई को विपिन ने खेत में काम करने की इच्छा जताई। उसके शांत और नम्र व्यवहार को देखते हुए उसे निर्माणाधीन बैरक के पीछे स्थित कृषि भूमि में काम पर लगाया गया।
शुक्रवार सुबह 35 बंदियों के साथ काम के दौरान वह चहारदीवारी से सटे पीपल के पेड़ पर चढ़ा और करीब 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गया। आरोपी की तस्वीर कौवाबाग चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। इसके बाद पुलिस की टीम आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है।
निर्माणाधीन बैरक बनी सुरक्षा में बड़ी खामी
डीआईजी ने बताया कि जिस निर्माणाधीन बैरक के पास से बंदी भागा, उसका हैंडओवर अभी जेल प्रशासन को नहीं मिला था। इसी कारण वहां चहारदीवारी पर कंटीले तार नहीं लगाए गए थे। घटना के बाद पेड़ कटवाने और पूरे सुरक्षा तंत्र की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुलाकात करने आई महिला भी जांच के दायरे में
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि 27 जुलाई को एक महिला जेल में विपिन से मिलने आई थी। उसने खुद को बंदी की साली बताया था। अब पुलिस उसकी पहचान और भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि फरार होने की साजिश में महिला की भी अहम भूमिका हो सकती है।
प्लेटफार्म नंबर-2 तक मिला सुराग, आगे तलाश जारी
सीसीटीवी फुटेज में फरार बंदी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-2 तक जाता दिखा है। इसके बाद वह कैमरों से ओझल हो गया। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं और फरार बंदी की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है।