गोरखपुर। छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए 65 वर्षीय व्यक्ति को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उरुवा से जिला अस्पताल रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस के लिए करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। परिजन 108 नंबर पर लगातार फोन करते रहे लेकिन उन्हें जल्द एंबुलेंस पहुंचने का आश्वासन ही मिलता रहा। काफी देर तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर परिजनों ने निजी वाहन से मरीज को ले जाने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच एंबुलेंस पहुंची और मरीज को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, उरुवा थाना क्षेत्र के पहाड़पुर निवासी राजकुमार गुप्ता शुक्रवार दोपहर छत से गिर गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। परिजन आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उरुवा लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने 108 नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। आरोप है कि फोन उठने के बाद उन्हें लगातार यही बताया जाता रहा कि एंबुलेंस उनके पास पहुंच रही है। काफी समय बीतने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो परिजन परेशान हो गए। उन्होंने निजी वाहन की व्यवस्था के लिए भी फोन करना शुरू कर दिया। इस दौरान मरीज पीएचसी परिसर में स्ट्रेचर पर तड़पता रहा। स्थिति को देखते हुए परिजनों ने मौके पर मौजूद चिकित्सक से मदद मांगी। चिकित्सक ने बेलघाट से एंबुलेंस की व्यवस्था कराने के लिए फोन किया। कुछ देर बाद एंबुलेंस पीएचसी पहुंची और परिजन राजकुमार को लेकर जिला अस्पताल रवाना हुए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जेपी त्रिपाठी ने बताया कि लगभग 2:30 बजे मरीज आया था। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने रेफर किया। उस समय यहां की एंबुलेंस जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गई थी। जिला मुख्यालय पर बात करने के बाद बेलघाट की गाड़ी भेजी गई जिससे उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।
राजघाट हादसे के बाद भी देर से पहुंची थी एंबुलेंस
बीते छह सितंबर को राजघाट स्थित गुरु गोरक्षघाट पर गुंबद गिरने से दो अधिवक्ता घायल हो गए थे। उस समय भी एंबुलेंस के देरी से पहुंचने का आरोप लगा था। परिजन उन्हें पिकअप और ई-रिक्शा से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इसके बाद वहां से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन वहां भी उन्हें करीब 40 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली। इसे लेकर अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया था। शाम तक दोनों अधिवक्ताओं की मौत हो गई थी।