- संक्रमण की वजह से गर्भाशय में सूजन और जलन की बढ़ रही दिक्कत
- एम्स में हो रही डिलीवरी में 20 फीसदी मामले प्रीमेच्योर के
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। महिलाओं में होने वाला संक्रमण गर्भावस्था की अवधि को कम कर दे रहा है। इससे समय से पहले ही डिलीवरी करानी पड़ रही है। एम्स में आने वाले लगभग 20 प्रतिशत प्रसव ऐसे हैं, जो गर्भावस्था की निर्धारित अवधि (37 सप्ताह) पूरी होने से पहले ही हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी प्रकार का संक्रमण हुआ रहता है।
एम्स की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि गर्भवतियों में संक्रमण, समय से पहले प्रसव (प्रीमेच्योर डिलीवरी) की प्रमुख वजह बन रहा है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले संक्रमण, विशेषकर यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआई), बैक्टीरियल वेजिनोसिस और अन्य वायरल संक्रमण गर्भाशय की झिल्लियों में सूजन और जलन पैदा करते हैं। इससे गर्भाशय में संकुचन जल्दी शुरू हो जाते हैं और प्रसव की प्रक्रिया समय से पहले आरंभ हो जाती है। महिलाओं में एनीमिया, मधुमेह, असमय गर्भधारण, कम वजन सहित अन्य समस्याएं भी पहले प्रसव के कारण बन सकती हैं। समय से पहले जन्म लेने वाले शिशु अक्सर लो बर्थवेट (कम वजन) के होते हैं। साथ ही कई बार उनके अंग भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते हैं। इन नवजातों को विशेष निगरानी और एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) की आवश्यकता होती है।
जांच और स्वच्छता से संक्रमण को कर सकते हैं कम
डॉ. आराधना ने बताया कि प्रीमेच्योर डिलीवरी को नियंत्रित करने के लिए गर्भवतियों में संक्रमण की समय पर पहचान और उचित इलाज जरूरी है। महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत से ही नियमित प्रसव पूर्व जांच कराना चाहिए।
प्रीमेच्योर डिलीवरी से शिशुओं में होने वाली समस्याएं
- सांस लेने में कठिनाई
- कम वजन और धीमी विकास दर
- न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमण का अधिक खतरा
- व्यावहारिक और सीखने की परेशानियां