मधवानगर निवासी अर्जुन यादव की पत्नी मीना देवी का मायका नेपाल के कोहडवरिया तौलिहवा में है। कहती हैं कि विवाह के बाद से प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन, नागपंचमी मनाने मायके जाती थीं। वह चिंता जताती हैं कि इस बार शायद नागपंचमी पर सखियों के साथ झूला नहीं झूल पाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो उन्हें इसका मलाल रहेगा।
वे कहती हैं कि सरकार रक्षाबंधन के दिन जिस तरह महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त करती हैं उसी तरह नेपाल सरकार से बात कर रक्षाबंधन के दिन सीमा खुलवाए ताकि बहनें अपने परिवार से मिलकर भाई को राखी बांध सकें।
वार्ड नंबर तीन लोहियानगर बढ़नी निवासी प्रदीप की पत्नी मनु का मायका फरसट्टीकर रूपेनदेई नेपाल में है। कहती हैं कि शादी के बाद लड़कियां हर वर्ष रक्षाबंधन का इंतजार करती हैं कि परिवार और भाईयों से मिलन होगा, सरकारों की खींचतान में हम विवाहिताओं का यह इंतजार लंबा न हो जाए, सरकारों को इस पर विचार करना चाहिए।
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बस स्टॉप निवासी शिव कुमार विश्वकर्मा की पत्नी सीमा स्थित कृष्णानगर नेपाल की रहने वाली हैं। कहती हैं कि वह नेपाल में पैदा जरूर हुईं लेकिन पढ़ाई से लेकर सहेलियां तक सीमा पार भारत के गांव घरुवार में हुई, हमेशा बेरोकटोक यहां और पिता के घर आना जाना रहा। भगवान से प्रार्थना करती हैं कि यह परंपरा इस बार भी जारी रहे।
भाजपा कार्यसमिति के सदस्य, वरिष्ठ नेता सुनील अग्रहरि कहते हैं कि वह नेपाल के सांसद अभिषेक प्रताप शाह, विधायक वीरेंद्र कानोडिया से लेकर दोनों जिलों के आला प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर रक्षाबंधन, नागपंचमी पर बहू-बेटियों के उनके मायके आने जाने की अनुमति दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।