फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस खास वजह से नेपाल से अपने वतन लौटे 25 हजार लोग, बोले- 'अब सब कुछ बर्बाद हो गया'

Mon, 22 Jun 2020 03:33 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
विज्ञापन
indo-nepal border - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

इन दिनों हर तरफ कोरोना का खौफ है। हर कोई इससे बचाव में जुटा है। ऐसे में नेपाल में कोरोना की वजह से सीमा सील है। वहीं नए नक्शे को लेकर भी मधेशी समुदाय असमंजश में है। इन सब के बीच नेपाल में काम करने गए भारतीय नागरिक अब अपने वतन लौट रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो अपना काम धंधा बेहतर ढंग से जमा लिए थे। ऐसे में उन्हें भी सब कुछ छोड़कर अपने वतन वापस लौटना पड़ रहा है।

विज्ञापन


वहीं दुकानें, होटलों में काम करने वाले कर्मी भी लौट रहे हैं। सर्वाधिक मजदूर तो ईंट भट्ठों पर काम करने वाले वापस लौटे हैं। करीब 25 हजार भारतीय कामगार नेपाल से लौट चुके हैं, जिनको घर भेज दिया गया है।

भारत-नेपाल सीमा सोनौली बॉर्डर के रास्ते भारतीय दूतावास काठमांडू के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के साथ बिहार, झारखंड, दिल्ली, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, असम, जम्मू, केरल, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों के रहने वाले भारतीय नागरिकों को भारत लाया गया है। सोनौली आब्रजन कार्यालय पर जरूरी प्रपत्र जमा कराने के बाद स्क्रिनिंग कराया गया। इसके बाद रोडवेज बस से सभी को उनके घर पहुंचाया गया।
विज्ञापन


क्षेत्राधिकारी नौतनवां राजू कुमार साव ने बताया कि 21 जून तक नेपाल से 25 हजार भारतीय नागरिक आ चुके हैं। सभी लोगों को बस से उनके घर भेज दिया गया। नेपाल से भारतीय नागरिकों के आने का क्रम हर रोज जारी है।

सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के नागरिक आए

नेपाल से आने वाले लोगों में सबसे ज्यादा 17 हजार नगरिक उत्तर प्रदेश के रहे। जबकि दूसरे नंबर पर बिहार और तीसरे नंबर पर झारखंड के निवासियों की संख्या है। नेपाल से आने वाले सभी भारतीय नागरिकों का इमीग्रेशन कार्यलय में मेडिकल जांच व सेल्फ डिक्लियरेशन फॉर्म भरवाकर सभी नागरिकों का डाटा लिया गया है।

उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड या किसी भी परिचय पत्र की फोटोकॉपी जमा कराई जा रही है। यदि परिचय पत्र नहीं रहा तो अपना या किसी रिश्तेदार या मित्र का मोबाइल नंबर भरवाया गया। इमीग्रेशन कार्यालय में लोगों को भोजन कराने के बाद सभी को रोडवेज की बसों से सोनौली से पहुंचाया जा रहा है, सभी नागरिकों को सोनौली हेल्थ डेस्क पर तैनात कर्मचारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिए। उसके आधार पर सभी लोग घर जाकर क्वारंटीन रहेंगे।
विज्ञापन

गांव की ओर चले कामगार

नेपाल में लॉकडाउन के बाद बेरोजगार हुए सभी भारतीय नागरिक धीरे धीरे अपने गांव की तरफ रुख कर लिए हैं। जो लोग लंबे समय से अपनों से दूर रहे, वह अब अपनों के करीब पहुंच रहे हैं। गोरखपुर जिले के कैपियरगंज रामनरेश ने बताया कि काठमांडू में होटल में काम करते थे। इन दिनों कोरोना के वजह से होटल बंद है, अब सब कुछ बर्बाद हो गया है। ऐसे में घर लौटना ही बेहतर लगा। उन्होंने बताया कि एक साल से घर नहीं गया था।

नेपाल से आने का क्रम 26 मई से शुरू हुआ
बीते 26 मई से को भारतीय कामगारों के नेपाल से आने का क्रम शुरू हुआ। जिसमें उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, राय बरेली, बहराइच जनपद के सबसे ज्यादा मजदूर रहे जो नेपाल केईंट भट्ठों पर मजदूरी करते थे। इसके साथ ही गोरखपुर, बनारस, भदोही, लखनऊ, महराजगंज, देवरिया, बलिया, कानपुर, आगरा के भी भारतीय नागरिक नेपाल में रहते थे, जो वहां के फैक्ट्री में नौकरी करते थे। साथ ही कुछ अपना रोजगार कर जीवन यापन कर रहे थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें