नेपाल से आने वाले लोगों में सबसे ज्यादा 17 हजार नगरिक उत्तर प्रदेश के रहे। जबकि दूसरे नंबर पर बिहार और तीसरे नंबर पर झारखंड के निवासियों की संख्या है। नेपाल से आने वाले सभी भारतीय नागरिकों का इमीग्रेशन कार्यलय में मेडिकल जांच व सेल्फ डिक्लियरेशन फॉर्म भरवाकर सभी नागरिकों का डाटा लिया गया है।
उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड या किसी भी परिचय पत्र की फोटोकॉपी जमा कराई जा रही है। यदि परिचय पत्र नहीं रहा तो अपना या किसी रिश्तेदार या मित्र का मोबाइल नंबर भरवाया गया। इमीग्रेशन कार्यालय में लोगों को भोजन कराने के बाद सभी को रोडवेज की बसों से सोनौली से पहुंचाया जा रहा है, सभी नागरिकों को सोनौली हेल्थ डेस्क पर तैनात कर्मचारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिए। उसके आधार पर सभी लोग घर जाकर क्वारंटीन रहेंगे।
नेपाल में लॉकडाउन के बाद बेरोजगार हुए सभी भारतीय नागरिक धीरे धीरे अपने गांव की तरफ रुख कर लिए हैं। जो लोग लंबे समय से अपनों से दूर रहे, वह अब अपनों के करीब पहुंच रहे हैं। गोरखपुर जिले के कैपियरगंज रामनरेश ने बताया कि काठमांडू में होटल में काम करते थे। इन दिनों कोरोना के वजह से होटल बंद है, अब सब कुछ बर्बाद हो गया है। ऐसे में घर लौटना ही बेहतर लगा। उन्होंने बताया कि एक साल से घर नहीं गया था।
नेपाल से आने का क्रम 26 मई से शुरू हुआ
बीते 26 मई से को भारतीय कामगारों के नेपाल से आने का क्रम शुरू हुआ। जिसमें उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, राय बरेली, बहराइच जनपद के सबसे ज्यादा मजदूर रहे जो नेपाल केईंट भट्ठों पर मजदूरी करते थे। इसके साथ ही गोरखपुर, बनारस, भदोही, लखनऊ, महराजगंज, देवरिया, बलिया, कानपुर, आगरा के भी भारतीय नागरिक नेपाल में रहते थे, जो वहां के फैक्ट्री में नौकरी करते थे। साथ ही कुछ अपना रोजगार कर जीवन यापन कर रहे थे।