चार माह से खराब था गेट का फाटक
बॉटलिंग प्लांट में कुल 135 स्टाफ तैनात हैं, जिसमें 20 सुरक्षा कर्मचारी हैं। सोमवार रात सुपरवाइजर की मौत से अन्य सुपरवाइजरों में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि फैक्ट्री का मुख्य द्वार लगभग चार माह से डैमेज था, जिसकी जानकारी जिम्मेदारों को थी, लेकिन ठीक नहीं कराया गया। इस लापरवाही की वजह से हादसा हुआ है।
दस जिलों में 40 हजार सिलिंडरों की होती है आपूर्ति
गीडा सेक्टर-15 स्थित इंडियन बॉटलिंग गैस प्लांट से पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर, बलिया, देवरिया, महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, मऊ समेत 10 जिलों में रसोई गैस की आपूर्ति की जाती है। फैक्ट्री में प्रतिदिन लगभग 40 हजार सिलिंडर का उत्पादन किया जाता है।
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हादसे के बाद प्लांट बंद कर दिया गया है। बुधवार से चलेगा। सप्लाई में किसी तरह दिक्कत नहीं है। मुख्य द्वार का फाटक कैसे गिरा, इसकी जांच मुंबई की टीम कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्लांट का संचालन निजी एजेंसी करती है। - सत्यव्रत सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक, कारपोरेट कम्युनिकेशन इंडियन ऑयल कारपोरेशन