राजकोट में पायल की जोड़ी कम से कम 30 ग्राम चांदी से तैयार होती है, आगरा में यही 15 ग्राम चांदी में तैयार हो जाती है। हनी ज्वेलर्स के अलावा गोरखपुर शहर के और भी सराफा कारोबारी आगरा, मथुरा और राजकोट से चांंदी की खरीद-बिक्री करते हैं।
इसमें कुछ खरीद फर्म के नाम पर करते हैं तो उसके सैकड़ों गुनी चांदी की खरीद कच्ची रसीद से होती है। सूत्रों के मुताबिक, हनी ज्वेलर्स के अलावा हिंदी बाजार के कई और धंधेबाज भी आगरा, मथुरा और राजकोट के चांदी व्यापारियों के संपर्क में रहते हैं। यहां से अवैध माल भी मंगाते हैं।
इसे भी पढ़ें: गोरखनाथ पुल के नीचे चलती बाइक में लगी आग, मचा हड़कंप
आगरा मंडी के प्रतिष्ठानों पांच से छह कर्मचारी हिंदी बाजार से लेकर अलीनगर, गोलघर और दूसरे बाजारों में तैनात हैं। वहां से माल आते ही ये कर्मचारी नकद भुगतान ले लेते हैं। इसके अलावा दो से तीन कर्मचारी मथुरा और राजकोट के भी बाजार में ही घूमते हैं।
बीआईएस सूत्रों ने बताया कि आगरा में चांदी के नाम पर जर्मन सिल्वर बेचे जाने का धंधा भी जोरों पर हैं। सूत्रों ने बताया कि शुद्ध चांदी के बार पर शुद्धता 99.99 लिखा होता है, लेकिन जर्मन सिल्वर में चांदी के साथ तांबा, जस्ता, रांगा और एल्युमीनियम धातू मिला होता है। इसलिए डिमांड ज्यादा होती है।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर मंडल में अभी तक 450 से अधिक मरीज, एक हजार बेड का है इंतजाम
हरवंश राम गली स्थित हनी ज्वेलर्स के खिलाफ शुरू हुई आयकर की छापेमारी चौथे दिन खत्म हो गई। शाम सात बजे टीम लौट गई। इसके पहले लखनऊ से आए वैल्यूवर फर्म पर मिले सोने-चांदी का मूल्यांकन कर बुधवार शाम लखनऊ लौट गए थे। बुधवार के बाद से टीम ने चांदी की खरीद-बिक्री व कच्चे पर्चे पर हुए कारोबार को लेकर मैनेजर से दिनभर पूछताछ की। टीम मथुरा के अलावा और कहां से चांदी की खरीद की गई है, के बारे में जानकारी हासिल करने में जुटी रही। रात लगभग आठ बजे टीम बिल-बुक्स व अन्य रिकार्ड कब्जे में लेकर यहां से रवाना हो गई।