- गेम में हार के बाद पैसे जुटाने और परिवार से बात छिपाने के लिए रची साजिश
गोरखपुर। ऑनलाइन गेम और सट्टे की आभासी दुनिया में जीतने की चाह अब युवाओं के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। हार के बाद रुपये जुटाने का दबाव और गेम में वापस जीतने की जिद कुछ छात्रों को ऐसे कदम उठाने पर मजबूर कर रही है जिनकी कल्पना सामान्य परिस्थितियों में वे खुद भी नहीं करते।
हाल के वर्षों में सामने आए मामले बताते हैं कि ऑनलाइन गेम की लत केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि छात्र झूठ, छल और अपराध की कहानी गढ़ने तक पहुंच रहे हैं। ऑनलाइन गेम में शुरुआत अक्सर मनोरंजन से होती है लेकिन लगातार खेलने और पैसे लगाने की आदत धीरे-धीरे जोखिम बढ़ाती जाती है। हार की भरपाई के लिए छात्र परिवार के पैसे इस्तेमाल करते हैं। जब रकम बड़ी हो जाती है तो घरवालों से इसे छिपाने का दबाव बढ़ता है। इसी दबाव में कुछ छात्र अपहरण जैसी झूठी कहानियां तक गढ़ रहे हैं।
इन मामलों में एक समान पैटर्न दिखाई देता है। पहले ऑनलाइन गेम या सट्टे में पैसा गंवाया फिर परिवार से रकम छिपाने के लिए बहाना बनाया।अंत में पुलिस और परिजनों को गुमराह करने की कोशिश की। इससे न सिर्फ परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी में पड़ता है बल्कि पुलिस का समय भी ऐसी जांच में खर्च होता है।
केस 1
सितंबर 2023 में ऑनलाइन लूडो में करीब तीन लाख रुपये हारने वाले बीए छात्र दीपांकर ने खुद के अपहरण की कहानी रची। मां को बेहोशी में बंधक बनाए जाने की तस्वीर भेजकर पांच लाख रुपये फिरौती मांगी। एम्स थाना पुलिस ने सर्विलांस से तलाश शुरू की और आठ घंटे में उसे लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया।
केस 2
जनवरी 2025 में सहजनवां के माड़ गांव के छात्र ने ऑनलाइन सट्टे में 12 हजार रुपये गंवाने के बाद अपहरण की झूठी कहानी बनाई। उसने बताया कि बुलेट सवार युवक उसे बस्ती ले गए और अंगूठा लगवाकर खाते से रुपये निकाल ले गए। जांच में सामने आया कि प्रसव के लिए जीजा ने भेजे रुपये वह ऑनलाइन सट्टे में हार गया था।