योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून का चाबुक चला तो कई पेशेवर बदमाशों और माफियाओं ने ठिकाने बदल लिए। कई मुठभेड़ में मारे गए, तो कई जेल पहुंच गए। लेकिन, कई ऐसे भी हैं, जो लूट-रंगदारी जैसी वारदातों को छोड़ कर जमीन, नौकरी के नाम पर जालसाजी में उतर गए। बदमाशों ने अपराध का तरीका बदला पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई के अंदाज को बदल लिया है। लुटेरे-माफियाओं के बाद अब रडार ठगों पर है।
पेशेवर पर अंकुश लगाने के साथ ही पुलिस ने जालसाजी की घटनाओं पर भी कार्रवाई शुरू कर दी। पहले जालसाजी की घटनाओं में 406 (अमानत में खयानत) का केस दर्ज करने वाली गोरखपुर पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज पर जालसाजी का केस दर्ज कर भू-माफिया की कमर तोड़ दी। कमलेश यादव, ओमप्रकाश, दीनानाथ जैसे भू-माफिया जेल गए, उनकी संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट के तहत जब्त की गई, कुछ पर बुलडोजर चला दिया गया तो कमलेश बाहर आते ही झारखंड भाग गया। जमीन के बदले रंगदारी मांगने वाले माफिया राकेश यादव, सुधीर सिंह जेल में हैं।
जमीन के नाम पर जालसाजी करने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो हर गली-चौराहे पर भू माफिया मिलने लगे। सबने किसी न किसी को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की और फिर धमकी देते। दूसरे की जमीन को अपना बताकर मामले को विवादित करने के खेल में पुलिस घुसी तो पता चला कि गोरखपुर में भू माफिया ने सीलिंग तक की जमीन की रजिस्ट्री कर दी है और इसमें रजिस्ट्रार तक शामिल हैं। सब जेल भेजे गए। पुलिस के पास कई ऐसे भी केस आए, जिसमें दूसरे की जमीन को किसी दूसरे ने अपना बताकर कूटरचित दस्तावेज से बेच दिया और तहसील में सेटिंग करके खारिज दाखिल भी करा लिया। लेकिन, अब वही तहसील पुलिस को यह सूचना देती है, कि जमीन को फर्जी तरीके से बैनामा करने की कोशिश की जा रही है।
अपराध करने वालों पर गैंगस्टर, बंद करा दिया एनसीआर
एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर के पदभार संभालने के बाद ही आईजी कार्यालय के सामने रंगदारी के लिए फायरिंग हुई। रामगढ़ताल के पास हॉस्पिटल में मरीज की मारामारी को लेकर फायरिंग हुई। इन घटनाओं से सबक लेते हुए एसएसपी ने आदेश जारी किया कि अब एनसीआर नहीं दर्ज होगा। बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खुलेगी, गैंगस्टर लगेगा और हर मामले में केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसका फायदा हुआ कि फायरिंग करने वाले सूरज सिंह जैसे पेशेवर बदमाशों की हिस्ट्रीशीट खुली, गैंगस्टर हुआ और जेल गया। वर्तमान में पुलिस ने फायरिंग, लूट, जालसाजी करने वाले 200 से अधिक गिरोह को पंजीकृत कर लिया है, जिसकी वजह से वह अपनी संपत्ति को बचाने के जुगत में लगे हैं। अपराध से तकरीबन तौबा कर लिए है।
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