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गोरखपुर एम्स के मरीज माफिया: इमरजेंसी के बाहर घूमते हैं, मरीजों को निजी एंबुलेंस से ले जाते हैं हॉस्पिटल

Sun, 07 Dec 2025 11:38 AM IST
रोहित सिंह रजनी ओझा, गोरखपुर

सार

शनिवार को दोपहर एक बजे के करीब एम्स इमरजेंसी गेट के सामने खड़ी निजी एंबुलेंसों के पास मौजूद बिचौलिए और कुछ कर्मचारी खुद ही मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करते नजर आए। दोपहर करीब 1:15 बजे बिहार से आई एक महिला मरीज को एक युवक ने खुद को एम्स का स्टाफ बताते हुए उसकी हालत गंभीर बताई और बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाने का सुझाव दिया।
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एम्स परिसर में इमरजेंसी के बाहर खड़ी एंबुलेंस. मरीज भर्ती होने का इंतजार करती मरीज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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एम्स में भी अब मरीज माफिया का नेटवर्क सक्रिय हो गया है। इमरजेंसी के पास बिचौलिए घूम रहे हैं जो तीमारदारों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद निजी एंबुलेंस में बैठाकर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। ये उन मरीजों को टारगेट करते हैं, जिन्हें इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जा रहा। ऐसे में तीमारदार बेहतर इलाज के नाम पर तैयार हो जाते हैं और इनका काम और भी आसान हो जाता है।

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शनिवार को दोपहर एक बजे के करीब एम्स इमरजेंसी गेट के सामने खड़ी निजी एंबुलेंसों के पास मौजूद बिचौलिए और कुछ कर्मचारी खुद ही मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करते नजर आए। दोपहर करीब 1:15 बजे बिहार से आई एक महिला मरीज को एक युवक ने खुद को एम्स का स्टाफ बताते हुए उसकी हालत गंभीर बताई और बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाने का सुझाव दिया। 

परिजनों के घबराए होने का फायदा उठाते हुए युवक ने पास खड़े एक निजी एंबुलेंस चालक को बुलाया और मरीज को तुरंत लेकर निजी अस्पताल जाने की सलाह दी। थोड़ी ही देर में एंबुलेंस चालक मरीज को लेकर एम्स परिसर से बाहर निकल गया। एंबुलेंस के पास मौजूद कुछ लोग आपस में चर्चा कर रहे थे।

उनके मुताबिक, बिहार से आने वाले मरीजों को पहले निजी अस्पताल भेजने के लिए 'दिमाग बदलना' पड़ता है, क्योंकि ऐसे मरीज एम्स के भरोसे आते हैं और शहर के निजी अस्पतालों के बारे में नहीं जानते। यही स्थिति सीवान (बिहार) के रविंद्र सिंह के साथ हुई। अपनी गंभीर बीमार पत्नी को लेकर वह एम्स आए थे लेकिन पर्ची और बेड आवंटन में देरी के बीच एक युवक ने खुद को स्टाफ बताते हुए उन्हें निजी अस्पताल ले जाने के लिए मना लिया।

गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला
देवरिया की सोनी देवी भी दोपहर करीब 1:30 बजे एम्स पहुंचीं पर लंबा इंतजार होने से परिजन परेशान हो गए और परिसर में खड़े निजी एंबुलेंस संचालक से संपर्क कर निजी अस्पताल चले गए। शनिवार को एम्स इमरजेंसी में ऐसे कई हालात देखे गए। बाहर खड़ी एंबुलेंस और उनके एजेंट मरीजों को सीधे झांसे में लेकर निजी अस्पताल भेजते दिखे।

जल्दी भर्ती न होना बनी बड़ी समस्या
एम्स की इमरजेंसी में मरीजों को भर्ती करने में देरी होने से गंभीर मरीज और उनके परिजन काफी तनाव में रहते हैं। मजबूरी में कई लोग निजी अस्पतालों की ओर रुख कर लेते हैं। परिजनों का कहना है कि यदि मरीजों को समय से भर्ती किया जाए और सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध हो, तो इलाज एम्स में ही कम लागत पर हो सकेगा।
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एम्स परिसर में निजी एंबुलेंस के प्रवेश पर रोक है। यदि निजी एंबुलेंस इमरजेंसी या आईपीडी ब्लॉक तक आ रही हैं तो यह गलत है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इसकी जांच करवाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

एम्स पर लोगों का विश्वास है और हम प्रयासरत हैं कि सभी मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। आईसीयू और इमरजेंसी में बेड की संख्या बढ़ने के बाद यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी: डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
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