विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की अहम बैठक एक जून को
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक जून को होने वाली विद्या परिषद की बैठक इस बार कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रस्तावों के कारण विशेष महत्व रखती है। बैठक में इंस्टीट्यूट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस की स्थापना और एकीकृत एमएलआईएस (मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इनफॉर्मेशन साइंस) पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी।
यदि इसे मंजूरी मिलती है तो सूचना विज्ञान और पुस्तकालय अध्ययन के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा। कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विश्वविद्यालय के विस्तार, नए संस्थानों की स्थापना और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण से जुड़े कई प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। बैठक का प्रमुख आकर्षण इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया, फिल्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना का प्रस्ताव होगा।
माना जा रहा है कि परिषद इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए इसे आगे अनुमोदन के लिए संस्तुति प्रदान कर सकती है। यह कदम मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका को नई दिशा देगा और छात्रों के लिए रोजगारोन्मुख अवसरों का विस्तार करेगा।
इससे पहले सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (सीडीओई) के अंतर्गत चार वर्षीय स्नातक, बीबीए और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अध्यादेश को स्वीकृति मिल चुकी है। अब इन्हें विद्या परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसी बैठक में मनोविज्ञान विभाग के चार वर्षीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर सेमेस्टर प्रणाली को सत्र 2026-27 से लागू करने की संस्तुति दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। यह बदलाव मनोविज्ञान शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और शोधोन्मुख बनाएगा।
इसके अलावा महाराणा प्रताप परिसर स्थित महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ संस्थान को कला संकाय से संबद्ध करने का प्रस्ताव भी एजेंडा में शामिल है। इससे शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों के बेहतर समन्वय और विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद की जा रही है।