डॉक्टरों के समर्थन में आया आईएमए, एसपी सिटी से की मुलाकात
गोरखपुर। गर्भस्थ शिशु के बारे में गलत जानकारी देकर छल करने के आरोपित चारों डॉक्टरों के समर्थन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगे आ गया है।
रविवार को आईएमए अध्यक्ष और सचिव ने अन्य सदस्यों के साथ एसपी सिटी सोनम कुमार से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि तीन अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जांच की गई। सबकी रिपोर्ट कैसे गलत हो सकती है? उन्होंने कहा कि इस मामले में चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाना समझ से परे है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल व मीडिया प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा ने एसपी सिटी से कहा कि मेडिकल साइंस इतना विकसित नहीं है कि किसी चीज को 100 फीसदी पकड़ सके। हर जांच की एक सीमा होती है। कोई भी जांच डॉक्टर की सहायता के लिए होती है। यह समझ लेना कि जांच से सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा, गलत है। हमें किसी दिव्यांग बच्चे के पैदा होने पर उतना ही कष्ट है, जितना उसके परिवार को है। परंतु कई बार बच्चा गर्भ में इस स्थिति में रहता है कि अल्ट्रासाउंड की किरणें वहां नहीं पहुंच पातीं। इसकी वजह से जांच ठीक से नहीं हो पाती।
उन्होंने कहा कि मरीज को पूरा हक है कि वह रिपोर्ट के बारे में सब कुछ जाने। कोई भी डॉक्टर जान-बूझकर किसी मरीज को नुकसान नहीं पहुंचाता। इस मामले में एफआइआर दर्ज करके गलत धारा लगाना निश्चित तौर पर सही नहीं है। इससे डॉक्टरों का मनोबल टूटेगा। वह जांच करना बंद कर देंगे। आईएमए इसका विरोध करता है।
आईएमए के पदाधिकारियों के मुताबिक, एसपी सिटी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. जेपी जायसवाल, डॉ. स्मिता जयसवाल और डॉ. अंजू मिश्रा आदि मौजूद रहे।
डॉ. काजल ने नहीं दिया जवाब
मामले में आरोपित डॉ. काजल ने अब तक मेडिकल बोर्ड को जवाब नहीं दिया है। सीएमओ की ओर से भी उन्हें कई बार नोटिस देकर बुलाया गया, लेकिन वह नहीं पहुंचीं। सहजनवां स्थित जिस अल्ट्रासाउंड सेंटर में वह सोनोग्रॉफी करती थीं, उसे प्रशासन की ओर से शनिवार को सील कर दिया गया है। इस संबंध में डॉ. काजल का पक्ष नहीं मिल सका। जब भी उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।