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पैसे कमाने दुबई जाना चाहते हो तो पहले इन तीनों की आपबीती जान लें, मुश्किल से लौटे हैं वापस

Fri, 07 Feb 2020 09:31 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, कुशीनगर
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परिवार के साथ प्रमोद। - फोटो : अमर उजाला
अच्छी नौकरी पाने का ख्वाब लेकर दुबई जाने का सपना देख रहे हो तो आपको भविष्य में अपने फैसले पर पछताना न पड़े, इसके लिए ये खबर पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है। आठ माह दुबई गए कुशीनगर के प्रमोद और बिहार के दो युवकों को एजेंट की मनमानी के चलते छह माह तक कष्ट काटना पड़ा।

बिना पासपोर्ट के वहां फंसे इन तीनों युवकों को विदेश मंत्रालय की मदद से दो दिन पहले अपने घर वापस आने का मौका मिला। घर पहुंचते ही इन युवकों ने विदेश मंत्रालय व सामाजिक संगठनों के प्रति आभार जताया।
 
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- फोटो : अमर उजाला
रामकोला थाना क्षेत्र के ग्राम डम्मर छपरा निवासी प्रमोद कुशवाहा पुत्र सत्यप्रकाश कुशवाहा बीते वर्ष 14 मई को गोरखपुर के घासीकटरा मुहल्ला के रहनेवाले एजेंट के माध्यम से दुबई गए थे। वहां पहुंचने पर एजेंट ने पहले बताए गए कंपनी की बजाय किसी अन्य कंपनी में मजदूरी के काम पर लगा दिया। वहां प्रमोद को काम के बदले वेतन भी नहीं मिल रहा था। जब उसने आपत्ति की तो कंपनी एजेंट ने मार पीटकर प्रमोद का पासपोर्ट छीन लिया और बंधक बनाकर कार्य कराया जाने लगा।
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परिवार के साथ प्रमोद। - फोटो : अमर उजाला
प्रमोद जैसी हालत ही वहां पहले से फंसे बिहार प्रांत के बक्सर जिले के एकौना गांव निवासी शंभूनाथ चौधरी के बेटे ऋषिकांत व रोहतास जिले के कोडडीह निवासी गिरजांनद सिंह के बेटे रोहित कुमार की थी। तीनों युवाओं के पास पासपोर्ट नहीं था लिहाजा वे कंपनी के गेट से बाहर भी नहीं निकल पा रहे थे। मामले की जानकारी होने पर प्रमोद के परिजनों ने एसएसपी गोरखपुर व विदेशी मंत्रालय को पत्र लिखा। मामले का संज्ञान लेते हुए विदेश मंत्रालय ने दुबई स्थित भारतीय दूतावास को कार्रवाई के लिए कहा।
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दूतावास ने बताए गए पते पर संपर्क किया और कंपनी मालिक व एजेंट को तलब कर पासपोर्ट वापस कराया। इसके बाद तीनों युवकों को चार फरवरी को वापस भारत भेजा गया।

बृहस्पतिवार को घर पहुंचकर भाईयों के साथ प्रसन्न बैठे प्रमोद ने बताया कि उन लोगों को घर वापसी की उम्मीद नहीं थी। परंतु विदेश मंत्रालय व भारतीय दूतावास के प्रयास से जब घर पहुंचे तब जाकर विश्वास हुआ। प्रमोद के भाई शेषनाथ का कहना है की घर में शादी है। भाई के सकुशल आ जाने से खुशियां दो गुनी हो गई हैं।
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