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Gorakhpur News: गोदामों की जांच हो तो खुल जाएगा दवाओं की धंधेबाजी का खेल

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पटना में मिली गोरखपुर के बैच नंबर की दवाइयां, फिर भी नहीं हुई गोदामों की जांच
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- भलोटिया मार्केट से बिहार व नेपाल बार्डर तक भेजी जाती है दवाइयां

- पहले पकड़ी जा चुकी हैं अधोमानक और प्रतिबंधित दवाएं

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी आजकल प्रतिबंधित दवाओं के ब्रिकी को लेकर चर्चा में है। यहां की चार फर्माों की नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम जांच कर अभिलेख अपने साथ ले जा चुकी है। यह कार्रवाई पटना में मिली गोरखपुर की आवंटित दवाओं को लेकर हुई है। हालांकि, इस मामले में कार्रवाई की उम्मीद कम ही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर वास्तव में धंधेबाजी पकड़नी होती तो जांच एजेंसियां दवा के गोदाम की जांच करतीं।
भालोटिया मार्केट में दवा कंपनियों से सीधे दवाइयां आती हैं। यहां तकरीबन हर दवा कंपनी की एजेंसी है। भलोटिया मार्केट से जुड़े सूत्र ने बताया कि नौसड़ से वाराणसी जाने वाले रोड पर एक दवा विक्रेता ने अपना गोदाम बना रखा है। वहां वाराणसी से दवाइयों की खेप आती है और फिर वहीं से सीधे फोरलेन के रास्ते बिहार चली जाती है। एक और दवा विक्रेता ने भालोटिया मार्केट के नजदीक ही अपना गोदाम बना रखा है। वहां से रात में पिकअप से पड़ोसी जिले महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, आजमगढ़, मऊ के अलावा बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, छपरा और सीवान तक दवाइयां जाती हैं। अब तो यहां से पटना तक दवाएं भेजी जाने लगी हैं। नेपाल बार्डर व बिहार के कुछ इलाकों में खांसी के सीरप और मानसिक रोग के उपचार में प्रयुक्त टेबलेट को नशे के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। इनको मनमानी रेट पर बेचा जाता है। खुद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की तरफ से इस पर नियंत्रण के लिए कई बार पत्र भी जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद दवाओं के इस धंधेबाजी पर रोक के प्रयास नहीं हो रहे हैं। ताजा मामला पटना में मिली दवाइयों का चल रहा है।
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कोट-
भालोटिया में नारकोटिक्स टीम ने क्या और क्यों जांच की, इसकी कोई जानकारी नहीं है। ड्रग विभाग की तरफ से अभी कोई विशेष जांच नहीं की जा रही है। नियमित सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है।

जय सिंह, ड्रग इंस्पेक्टर

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