केंद्र सरकार के हम दो-हमारे दो का नारा पूर्वांचल के 28 जिलों में विफल साबित हुआ है। पूर्वांचल में हम दो-हमारे दो की जगह हम दो-हमारे चार का फॉर्मूला चल रहा है। पूर्वांचल में प्रजनन दर 3.8 फीसदी है, जबकि प्रदेश की औसत प्रजनन दर 2.7 फीसदी है। यहां चार लोगों की जगह औसतन 7.5 सदस्यों का परिवार है। यह प्रदेश के औसत से करीब डेढ़ गुना अधिक है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को पूर्वांचल के 28 जिलों की सेहत सुधारने की जिम्मेदारी मिली है। इस संबंध में एक सप्ताह पहले विशेषज्ञों की ओर से कार्यशाला भी हुई थी। इसमें नीति आयोग से मिले आंकड़ों को जब विशेषज्ञों ने देखा तो वह काफी चिंतित हुए। एम्स प्रशासन ने नीति आयोग से मिले आंकड़ों और स्वास्थ्य एवं जनसंख्या से जुड़े तथ्यों को देखा तो उन्हें बड़ी हैरानी हुई। पूर्वांचल में प्रति महिला 3.8 फीसदी जन्म दर होने से महिलाओं और बच्चों की सेहत अच्छी नहीं है। इन्हीं 28 जिलों की जिम्मेदारी एम्स को सौंपी गई है।
हर महिला औसतन चार बच्चों को दे रही जन्म
प्रदेश में सबसे अधिक प्रजनन दर पूर्वांचल की है। प्रदेश के पिछड़े इलाकों में शुमार गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन, वाराणसी और अयोध्या मंडल के जिलों में प्रजनन दर 3.8 फीसदी मिली है। यह आंकड़े नीति आयोग के हैं। जबकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-फोर में सूबे में औसत प्रजनन दर 2.7 प्रतिशत है। इसमें भी शहरी क्षेत्रों में 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 3.0 फीसदी थी।
हर परिवार में हैं सात से अधिक सदस्य
एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि पूर्वांचल में यूपी हेल्थ इंडिकेटर के पीछे रहने की बड़ी वजह बड़ा परिवार हैं। पूर्वांचल में जनसंख्या घनत्व अधिक है। हर परिवार में कम से कम सात सदस्य हैं। इस वजह से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव ज्यादा है। जबकि हम दो-हमारे दो के नारे को ध्यान में रखकर परिवार चलाया जाए तो स्वास्थ्य सेवाएं हर परिवार को बेहतर मिल सकेंगी।
28 जिलों की सेहत सुधारेगा एम्स
नीति आयोग और स्वास्थ्य एवं जनसंख्या से जुड़े आंकड़े मिलने के बाद एम्स बेहद चिंतित है। यही वजह है कि पूर्वांचल के 28 जिलों के लोगों की सेहत की जिम्मेदारी एम्स ने उठा ली है। इन जिलों में पनप रही बीमारियों पर एम्स अध्ययन करेगा। पूर्वांचल के 28 जिलों में गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, जौनपुर, बलिया और अंबेडकरनगर आदि शामिल हैं।
ज्यादातर बच्चों का वजन है कम
पूर्वांचल के 28 जिलों में ज्यादातर जन्म लेने वाले बच्चों का वजन भी कम है। शिशु मृत्यु दर ज्यादा है। टीबी के मरीजों की ठीक होने की दर बेहद कम है। बाहर कमाने वाले लोग बीमार होकर आ रहे हैं। इस वजह से उनके परिवार सहित आसपास के लोग भी बीमार हो रहे हैं।