गोरखपुर। शहर के अलग-अलग छात्रावासों में भी सिलिंडर के महंगे होने का असर पड़ने लगा है। कॉमर्शियल सिलिंडर के बढ़े दामों ने छात्रावास संचालकों और छात्रों का बजट बिगाड़ दिया है। संचालकों का कहना है कि अभी पिछले महीने तक इसका असर टिफिन सर्विस के दामों पर नहीं पड़ा था लेकिन यही हाल रहा तो दाम बढ़ाने पड़ेंगे।
बक्शीपुर में छात्रावास चलाने वाली ब्यूटी श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह से ही छात्राओं के लिए भोजन के साथ टिफिन सर्विस का इंतजाम शुरू हो जाता है। अभी पहले सिलिंडर नहीं मिलने से इंडक्शन पर कुछ दिनों तक खाना बनाया गया। इंडक्शन पर खाना परिवार के लिए या पांच से सात लोगों के लिए ही होता है। अधिक मात्रा में भोजन सामग्री बनानी पड़ेगी तो समय भी अधिक लगेगा और बनाने में दिक्कत आएगी। दिन में दो बार भोजन और फिर से उसे गर्म करने के अलावा, चाय नाश्ता और छात्राओं की डिमांड पर रात में दूध भी दिया जाता है। ऐसे में एक प्लेट का 100 रुपये के हिसाब से ढाई से तीन हजार रुपये महीने का लिया जाता है। सब्जी और अन्य महंगाई के बीच सिलिंडर की महंगाई और मारामारी बजट बिगाड़ रही है।
खाने के टिफिन का काम करने वाला राजकुमार ने बताया कि सिलिंडर के बढ़े दामों का असर पड़ने लगा है। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर के दाम में 993 रुपये की भारी-भरकम बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 3194 रुपये हो गई है। ऐसे में महीने में दो सिलिंडर और भोजन के कच्चे सामान के बढ़े दाम ने इस महीने महंगाई सिर पर डाल दी है। कैंटीन से टिफिन बाहर भी जाता है और छात्रावास में भी छात्र लेते हैं। टिफिन के दामों में कुछ बढ़ोतरी करना मजबूरी है।