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मिलावट का जहर: सेहत से खिलवाड़, मिलावटी चीजें लोगों ने खाई- हुए बीमार; एम्स में 2 दिन में पहुंचे 403 मरीज

Sun, 08 Mar 2026 11:18 AM IST
Rohit Singh रजनी ओझा, गोरखपुर

सार

शनिवार को एम्स की ओपीडी में करीब 297 मरीज पहुंचे, जिनमें पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बदहजमी और आंखों में जलन की शिकायत वाले मरीज अधिक रहे। एम्स के डॉ. अजय मिश्र ने बताया कि होली पर लोगों ने गुझिया, नमकीन, ठंडाई, मिठाई और अन्य तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन किया। कई जगहों पर मिलावटी मावा और खराब तेल से बने पकवान भी खाए गए। इसके कारण लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। 
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एम्स की ओपीडी में पहुंचे मरीज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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होली पर लोगों ने जमकर पकवानों का स्वाद लिया लेकिन ये अब बीमारी का सबब बन रहा है। मिलावटी खाद्य सामग्रियों से तैयार खाद्य पदार्थों का सेवन अब मरीज बनाकर उन्हें अस्पताल पहुंचा रहा है। सिर्फ एम्स में ही दो दिन में 403 मरीज पेट की बीमारी के उपचार के लिए पहुंचे हैं।
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इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। एम्स, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बदहजमी और आंखों में जलन जैसी बीमारियों वाले मरीज पहुंच रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों, तली-भुनी चीजों और मौसम में अचानक बदलाव के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है।

शनिवार को एम्स की ओपीडी में करीब 297 मरीज पहुंचे, जिनमें पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बदहजमी और आंखों में जलन की शिकायत वाले मरीज अधिक रहे। एम्स के डॉ. अजय मिश्र ने बताया कि होली पर लोगों ने गुझिया, नमकीन, ठंडाई, मिठाई और अन्य तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन किया।

कई जगहों पर मिलावटी मावा और खराब तेल से बने पकवान भी खाए गए। इसके कारण लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। शुक्रवार को भी इस समस्या से पीड़ित लगभग 150 मरीज पहुंचे थे। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. बीके सुमन ने बताया कि डायरिया और उल्टी-दस्त से पीड़ित कुछ मरीज भी उपचार के लिए आए थे।

कई लोग त्योहार के दौरान खान-पान पर नियंत्रण नहीं रख पाते। एक साथ ज्यादा मीठा और तला हुआ खा लेते हैं। इससे पेट में गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या हो जाती है। कुछ मरीजों को तेज पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचना पड़ा। ऐसे मरीजों को ओआरएस घोल पीने, उबला या साफ पानी पीने और बाहर के खाने से परहेज करने की सलाह दी गई है।

नेत्र रोग विभाग में भी बढ़े मरीज
एम्स के नेत्र रोग विभाग में भी कई मरीज पहुंचे। दरअसल, होली में कई लोग केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदायक साबित होने लगता है। शनिवार को एम्स में लगभग 90 मरीज पहुंचे, जिनमें से 40 से 50 मरीज ऐसे थे जिन्हें आंखों में रंग जाने, जलन, खुजली और लालिमा की शिकायत थी। डॉक्टर ने सलाह देने के साथ ही दवाई भी दी। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि आंख में कुछ चला जाए तो उसे मसलना नहीं चाहिए बल्कि साफ पानी से आंखों को धोना चाहिए।

कृष्णानगर के 43 वर्षीय अतुल ने बताया कि होली में नॉनवेज और बाद में मिठाई खाने की वजह से डायरिया की दिक्कत हो गई। दो दिन से डॉक्टरों के चक्कर लगा रहे हैं। पाचन तंत्र पहले से खराब होने के कारण दिक्कत दवाओं से ठीक नहीं हुई। डॉक्टर को दिखाने पर जांच के साथ दवाओं के लिए कहा गया है।

बेतियाहाता के 39 वर्षीय विनय अग्रवाल ने बताया कि होली पर घर पर ही सारे पकवान बने थे लेकिन सामान सही जगह से नहीं लिया। सस्ते के चक्कर में मिलावटी तेल लेते आया। होली के दिन घर में बने पकवानों के कारण सबका हाजमा खराब हो गया। पास के डॉक्टर को दिखाकर सभी को दवा दी। सबकी स्थिति ठीक हो गई। पिताजी पहले से गैस्ट्रो के मरीज हैं। इनकी हालत ज्यादा खराब होने पर अस्पताल लाना पड़ा।
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बांसगांव के 42 वर्षीय आदित्य मिश्र ने होली पर बाजार से नमकीन और खोआ खरीदा था। आदित्य ने बताया कि होली के बाद सभी को पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी महसूस होने लगी। डॉक्टर को दिखाने पर फूड पॉइजनिंग की समस्या मिली है। डॉक्टर ने दवाओं के साथ घर का हल्का खाना खाने के लिए कहा है।

बक्शीपुर के मंशू ने बताया कि होली में ठंडाई पीने के बाद गुझिया खा लिया था। बाजार की खरीदी हुई मिलावटी गुझिया खाने से तबीयत बिगड़ गई। दो दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। त्योहारों में बाहर की कोई भी चीज बाहर की खाने से तबीयत बिगड़ जाती है।


 
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