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स्वर्णिम विजय मशाल यात्रा: शहादत को याद कर नम हुई आंख, सर्वोच्च बलिदान पर गर्व

Sat, 20 Nov 2021 08:54 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

सम्मान के दौरान वीर नारियों को जहां उनकी पुरानी यादें ताजा हुई और उनकी अंदर ही अंदर आंखें नम रहीं तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने पतियों के सर्वोच्च बलिदान पर गर्व की अनुभूति भी की।
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वीर नारियों को सम्मानित करते जनरल। - फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर में जीआरडी में स्वर्णिम विजय मशाल यात्रा के स्वागत के बाद देश के लिए प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की छह वीर नारियों को सम्मानित किया। इसके अलावा भारत-पाक युद्ध में शामिल होने वाले पूर्व अफसरों और सैनिकों को भी लेफ्टिनेंट जनरल एस. मोहन, एसएम, वीएसएम द्वारा सम्मानित किया गया।

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सम्मान के दौरान वीर नारियों को जहां उनकी पुरानी यादें ताजा हुई और उनकी अंदर ही अंदर आंखें नम रहीं तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने पतियों के सर्वोच्च बलिदान पर गर्व की अनुभूति भी की।

कुशीनगर जिले के सेवरही एरिया के धर्मपुर निवासिनी शिवराजी देवी पत्नी शहीद सैनिक मेघनाथ महतो, लक्ष्मी थापा पत्नी शहीद सैनिक शेर बहादुर गुरूंग, चंपा देवी पत्नी शहीद सैनिक लाल बहादुर थापा, पिंकी चौरसिया पत्नी शहीद सैनिक चंद्रभान चौरसिया निवासी दुमही कुशीनगर, सुनीता गौड़ पत्नी शहीद सैनिक राम सेवक गौड़ निवासी ददरी, बड़हलगंज, गोरखपुर एवं रीना सिंह पत्नी शहीद नायक रंजीत सिंह निवासी आदर्श नगर सिंघड़िया मूल निवासी मर्दह, गाजीपुर को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
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वर्ष 2004 में शहीद हुए पति
देवरिया रूद्रपुर की रहने वाली रीना सिंह ने बताया कि वर्ष 2004 में श्रीनगर के बारामुला में उग्रवादियों से मुठभेड़ में पति शहीद हुए। उस वक्त बड़ी बेटी प्रिया पांच वर्ष तो दूसरी बेटी प्रियंका सात वर्ष की थी। पति का शहादत पर गर्व की अनुभूति होती है। बड़ी बेटी प्रियंका सीडीएस की तैयारी कर पिता की तरह देश की सेवा करना चाहती हैं।

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