गोरखपुर। होम्योपैथी चिकित्सा जगत के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. राम रतन बनर्जी (90) का शनिवार सुबह निधन हो गया। वह दुर्गाबाड़ी बंगाली समिति के संरक्षक भी थे।
करीब सात दशकों तक चिकित्सा और मानव सेवा के लिए समर्पित रहे डॉ. बनर्जी ने गरीबों और जरूरतमंदों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. बनर्जी के पुत्र डॉ. रूप कुमार के नाम पत्र भेजकर शोक संवेदना व्यक्त की।
डॉ. बनर्जी को उनके कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित यश भारती सम्मान से अलंकृत किया गया था। तीन जून 1936 को गोरखपुर में जन्मे डॉ. बनर्जी ने राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद सेंट एंड्रयूज कॉलेज से इंटरमीडिएट और बीएससी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कोलकाता के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1959 में स्वर्ण पदक हासिल किया। वर्ष 1975 में उन्होंने न्यूयॉर्क से होम्योपैथिक चिकित्सा विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। डॉ. बनर्जी ने वर्ष 1959 में चिकित्सा सेवा शुरू की। बेनीगंज-रानिगंज स्थित संतोष होम्यो सेवाश्रम उनका प्रमुख चिकित्सा केंद्र रहा। यहां उन्होंने जरूरतमंद मरीजों को उपचार देने के साथ निशुल्क चिकित्सा शिविरों और दवा वितरण के माध्यम से भी सेवा की।