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नरसिंह भगवान की रंग भरी शोभायात्रा में शामिल होंगे सीएम योगी, इन रंगों पर लगा प्रतिबंध

Sun, 08 Mar 2020 02:59 AM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • आरएसएस और होलिकोत्सव समिति की ओर से निकाली जाएगी शोभायात्रा
  • यात्रा में काले और नीले रंग के गुब्बारे पर रहेगा प्रतिबंध
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। (file) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्री होलिकोत्सव समिति गीतानगर की ओर से 10 मार्च को होली के मौके पर भगवान नरसिंह की रंग भरी शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे। यह जानकारी आयोजन समिति के आत्मा सिंह ने दी।
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उन्होंने बताया कि इस बार मंगलवार को अबीर-गुलाल और रंगों के बीच शोभायात्रा की शुरुआत सुबह 8:30 बजे घंटाघर से होगी। शोभा यात्रा से पहले संघ की शाखा लगेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों को संबोधित करेंगे। उसके बाद गीत और प्रार्थना होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के तौर पर भगवान नरसिंह की आरती कर रथ पर सवार होंगे। फिर रंग-गुलाल खेलते हुए शोभा यात्रा आगे बढ़ेगी।

समिति के अरुण प्रकाश मल्ल ने बताया कि शोभा यात्रा घंटाघर से निकलकर मदरसा चौक, लालडिग्गी, मिर्जापुर, घासी कटरा, जाफरा बाजार, चरण लाल चौक, आर्यनगर, बक्शीपुर, नखास चौक, रेती चौक होते हुए घंटाघर लौटकर समाप्त होगी। शोभायात्रा में नशा कर शामिल होना, नीले और काले रंग के गुब्बारों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
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शोभायात्रा के जरिए नानाजी देशमुख ने शुरू कराई थी नई परंपरा

होली पर निकलने वाली परंपरागत भगवान नरसिंह की शोभायात्रा शहर के होली की पहचान बन चुकी है। कभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बनकर शहर आए नानाजी देशमुख ने यहां शोभायात्रा की कमान अपने हाथों में लेकर पर्व पर नई परंपरा शुरू कराई थी।

नानाजी देशमुख 1939 में गोरखपुर में संघ के प्रचारक बनकर आए तो देखा कि यहां होली पर घंटाघर से निकलने वाली भगवान नरसिंह की शोभायात्रा में लोग कीचड़, काले व हरे रंगों का इस्तेमाल करते थे। उन्हें यह ठीक नहीं लगा और उन्होंने युवाओं को संगठित कर इस प्रथा को बदलने का जिम्मा उठाया। होली के दिन शोभायात्रा के लिए उन्होंने हाथी का इंतजाम किया और महावत से कहा कि जहां भी काले या हरे रंग का ड्रम दिखे, उसे वह हाथी से गिरवा दे। इसको लेकर कुछ अराजक लोगों ने युवाओं की टीम से नोकझोंक भी की, लेकिन तीन साल के प्रयास के बाद 1948 से भगवान नरसिंह की शोभायात्रा में सिर्फ रंग का इस्तेमाल होने लगा। काले और हरे रंग का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद हो गया। 
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