एमएमएमयूटी के कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था। प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी थी। प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
शुल्क और आवंटन पत्र के मिलान में पाया गया कि कई छात्रों का प्रवेश, सूची से भिन्न नामों से है। कुलपति के निर्देश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी में अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रामअचल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय व प्रो. पीके सिंह शामिल थे। कमेटी की संस्तुति पर 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया। साथ ही कमेटी की संस्तुति पर विद्या परिषद की बैठक में कुछ शिक्षक व कर्मचारियों को भी दोषी बताते हुए उनपर कार्रवाई की चर्चा हुई।
इसे भी पढ़ें: गंडक में कूदीं दो सहेलियों में एक का मिला शव, प्रेम संबंध में शिक्षक गिरफ्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में फर्जी दस्तावेज के आधार पर बीटेक में 40 छात्रों के प्रवेश के मामले में तीन शिक्षकों और पांच कर्मचारियों को प्रथमदृष्टया दोषी माना है। जांच में पाया गया कि प्रवेश के दौरान उन्होंने लापरवाही बरती है। सभी को नोटिस देकर जवाब भी विवि प्रशासन ने ले लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है, जो गुण-दोष के आधार पर कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। विवि प्रशासन को रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।