घटना के आधे घंटे बाद पहुंची मदद, एंटी रोमियो टीम की सक्रियता पर भी उठे सवाल
मार्च से मई तक 88 हजार से अधिक लोगों की जांच और 28 हजार को चेतावनी देने का दावा
गोरखपुर। जिले के 29 थानों में मिशन शक्ति केंद्र के तहत एंटी रोमियो स्क्वाॅड होने के बावजूद सरेराह छात्राओं से छेड़खानी और पिटाई की घटना ने महिला सुरक्षा के दावों की हकीकत उजागर कर दी है। मंगलवार शाम 4:45 बजे हुई वारदात में तीन शोहदों ने छात्राओं को निशाना बनाया। एक घंटे बाद शाम 5:45 बजे डॉयल 112 पर सूचना दी गई, लेकिन पुलिस आधे घंटे बाद पहुंची। इससे रिस्पांस टाइम और मौके तक पहुंचने की अवधि को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहर के कुल 30 थानों में से साइबर थाने को छोड़कर 29 थानों में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन्हीं केंद्रों में एंटी रोमियो स्क्वाॅड को भी समाहित किया गया है। प्रत्येक थाने में दो महिला दरोगा सहित पांच से छह महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती है। गश्त के लिए एक स्कूटी भी उपलब्ध कराई गई है, जिस पर एक महिला दरोगा और एक महिला कांस्टेबल की ड्यूटी लगाई जाती है।
इसके साथ ही डाॅयल 112 पर भी एक महिला पुलिसकर्मी की तैनाती रहती है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थान पर पांच छात्राओं के साथ छेड़खानी होना और विरोध करने पर पिटाई तक की नौबत आ जाना सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जिस समय घटना हुई, उस दौरान संबंधित क्षेत्र में एंटी रोमियो और मिशन शक्ति टीम की मौजूदगी थी या नहीं, यदि थी तो घटना की जानकारी उन्हें क्यों नहीं मिल सकी, यह जांच का विषय है। महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस लगातार अभियान चलाने का दावा करती रही है।
उधर, महिला अपराध के नोडल अधिकारी एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल के अनुसार मार्च, अप्रैल और मई माह के दौरान जिले की एंटी रोमियो टीमों ने 88,791 व्यक्तियों की जांच की। इस अवधि में 54 अभियोग दर्ज किए गए, 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 28,522 लोगों को चेतावनी देकर छोड़ा गया। टीम लगातार काम कर रही है। लापरवाही बरतने वाली महिला पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।