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इस बड़े त्योहार पर लगा लॉकडाउन का ग्रहण, परेशान हो रहे हैं लोग, कैसे मनेगा पर्व

Wed, 15 Apr 2020 03:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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कपड़ा व्यापारियों ने नवरात्र, रमजान और शादी के सीजन के लिए कपड़ों का जो स्टाक खरीदा था, अब उसके दीपावली में ही निकलने के आसार हैं। व्यापारियों के मोटे अनुमान के मुताबिक गोरखपुर थोक व फुटकर कपड़ा मंडी की बात करें तो लगभग 500 करोड़ रुपये के कपड़ों का स्टाक भरा हुआ है। व्यापारियों का मानना है कि लॉकडाउन से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में लंबा समय लग जाएगा।
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इन दिनों शादी, रमजान का सीजन आने की वजह से झूमकर खरीदारी की जाती है। महज पंद्रह दिन मतलब, 15 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच में ही सूरत, गुजरात से मंगाए कपड़ों के स्टाक में लगभग 25 प्रतिशत की खरीददारी हो जाती है। लेकिन, इस बार 22 मार्च से ही जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन की शक्ल में  कोरोना का कहर बाजारों पर टूट पड़ा। व्यापारी फरवरी में होली के साथ ही अप्रैल में आने वाले रमजान त्योहार को देखते हुए कपड़ों का बड़ा स्टाक अपने पास मंगवा लेते हैं।

होली में तो थोड़ी बहुत खरीददारी हुई भी, लेकिन दस दिन के बाद( 22 मार्च) से ही कोरोना का ग्रहण लग गया है। इससे अप्रैल में आने वाले रमजान का व्यापार खासा प्रभावित हुआ। इसी बीच शादी की खरीददारी का वक्त बीत ही गया। 23 अप्रैल से रमजान की संभावित शुरूआत है और आगे शादी की तैयारियों का सीजन। शादी और ईद में शहर में 300 करोड़ रुपये का व्यापार होता है।
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हैंडलूम व्यापार पर भी पड़ा असर

सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर जिस तरह से पाबंदियां हैं, उससे व्यापारियों को शादी के सीजन से भी बहुत उम्मीद नहीं है। व्यापारियों को अब इस स्टाक के दीवाली पर ही निकलने की उम्मीद है। हालांकि लॉकडाउन के चलते जिस तरह से जेबों पर मार पड़ी है, उससे दीपावली पर भी कोई बड़ा चमत्कार होने की उम्मीद नहीं है। 

कपड़ा व्यापार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश निभानी ने बताया कि कोरोना की वजह से रमजान की तैयारियों को लेकर होने वाली खरीददारी एकदम कम हो गई। ईद के मॉडल वाले कपड़े त्योहार खत्म होने के बाद नहीं खप पाते हैं। इससे कपड़ा व्यापारियों को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।  अब हालात समान्य होने पर शादी के सीजन में मांग देखकर ही बाजार का कुछ अनुमान लग सकेगा।

 चीन का प्रभाव हैंडलूम कपड़ों पर जनवरी, फरवरी से ही दिखने लगा था। दरअसल, कोरोना वायरस की वजह से आउटलाइन बार्डर वाला सामान मिलना बंद हो गया था। शिफॉन व जॉर्जेट में चीन से आयात होने वाले जरकन व बीट्स बॉल के सामान का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा

बाजार ठप होने के बाद भी दिया वेतन

सिल्क साड़ी में भी 50 प्रतिशत इसी सामान का इस्तेमाल होता है। आयात निर्यात पर प्रतिबंध होने की वजह से इन सभी सामनों को आने से रोक दिया गया था। इससे शिफॉन और सिल्क की साड़ियां बनाने में काफी दिक्कतें आने लगीं।  बाजार सामान्य होने के बाद भी इन साड़ियों के नए स्टाक मंगाने पर काफी परेशानी आएगी।

गोरखपुर जिले के सभी पंजीकृत थोक व फुटकर दुकानों पर तकरीबन दस हजार कर्मचारी काम करते हैं। अप्रैल में बाजार बंद होने के बाद भी ज्यादातर कारोबारियों ने कर्मचारियों को वेतन दिया है। लेकिन, कारोबार पूरी तरह से बंद होने की वजह से बाजार में पेमेंट फंसा हुआ है। इससे छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों को परेशानी बढ़ेगी।

गोरखपुर से लेकर बिहार तक हुआ प्रभावित
थोक वस्त्र वेलफेयर सोसाइटी के मंत्री संजय अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर से थोक व फुटकर कपड़ों के स्टाक बिहार तक भेजे जाते हैं। इससे कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, पश्चिमी चंपारण ( बिहार) तक भेजा जाना वाला कपड़ा व्यापार प्रभावित हुआ है।

बिजली के बिल में दें राहत

कोरोना की वजह से वजह से व्यापार एकदम ठप हो गया है। कर्मचारियों को वेतन दिया गया है। ऐसे में बिजली निगम सभी कपड़ा व्यापारियों को एक राहत दे। जबतक कोरोना का प्रभाव रहेगा और  प्रतिष्ठान बंद रहेंगे उतने दिनों तक उन्हें बिजली के बिल में राहत दी जाए।
-चंद्रकेश निगम, मंत्री

बाजार खुलने के बाद व्यापारी करेंगे समीक्षा
लॉकडाउन खत्म होने का बाद पेमेंट, कारोबार समेत अन्य मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। बताया कि संगठन की तरफ से सरकार से राहत पैकेज की मांग की जाएगी। लॉकडाउन के बाद व्यापार को कैसे पहले की तरह सामान्य किया जाए
इस पर भी सभी व्यापारियों से चर्चा होगी।
-अनूप अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष
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व्यापारियों को होगी ईएमआई की चिंता

लॉकडाउन की वजह से सरकार ने बैंक ईएमआई में राहत दी है। लेकिन मई के बाद जून आते ही व्यापारियों को ईएमआई भरने की चिंता होने लगेगी। काफी समय से कारोबार पूरी तरह ठप है। स्थिति सामान्य हुई तो मई में भी व्यापार होने की उम्मीद काफी कम है। ऐसे में ईएमआई को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ी हुई है।
-संजय अग्रवाल, मंत्री

व्यापारियों इन सवालों को लेकर काफी परेशान
- स्थिति सामान्य होने और लॉकडाउन खत्म होने के बाद कारोबार पर कितना असर पड़ेगा? कारोबार शुरू होकर सामान्य हो पाएगा या नहीं ? इन दिनों का असर कारोबार पर कबतक रहेगा ?
- कोराना संकट की वजह से बाहर की मंडियों से लेनदेन एकदम ठप पड़ा है? लॉकडाउन खत्म होने के बाद इन बकाए रकम के आने में कितनी देरी होगी?
- समय से भुगतान नहीं मिल पाने से इसका प्रभाव कारोबार पर कितना पड़ेगा ?
- आने वाले दिनों में व्यापार को देखते हुए इसे प्रभावी बनाए रखने के लिए क्या क्या बदलाव किए जाने जरूरी होंगे?
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