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चटोरेपन की कीमत: जंक फूड बना रहा बीमार, युवाओं में फैटी लिवर से कैंसर तक का खतरा

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विश्व जंक फूड दिवस आज : शहर में रोजाना 1.20 करोड़ का हो रहा कारोबार
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मिलावटी तेल, बार-बार गर्म किए गए ऑयल और अजीनोमोटो से बढ़ रहा स्वास्थ्य संकट


गोरखपुर। घर की रसोई का पौष्टिक खाना अब युवाओं और बच्चों को कम भा रहा है। उसकी जगह पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, फ्रेंच फ्राइज और तले-भुने फास्ट फूड ने ले ली है। शहर में जंक फूड का कारोबार रोजाना करीब 1.20 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही सेहत पर खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यही चटोरेपन की आदत आने वाले वर्षों में फैटी लिवर, डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।
पहले फैटी लिवर और हृदय रोग जैसी समस्याएं अधिक उम्र में देखने को मिलती थीं लेकिन अब 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी इनके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों में मोटापा, कब्ज, गैस्ट्रिक और पोषण की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
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विमल कुमार गुप्ता बताते हैं कि जंक फूड के कारोबार में जबरदस्त उछाल आया है। होटल से लेकर स्ट्रीट वेंडर्स के कारोबार को अगर देखा जाए तो रोजाना एक करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री हो रही है।
अंकित मादनवाल रेडसीर की रिपोर्ट के हवाले से बताते हैं कि गोरखपुर समेत टियर-2 शहरों में ऑनलाइन फूड डिलीवरी का कारोबार पांच वर्षों में तीन गुना हो गया है। इसमें जंक फूड भी शामिल है। दूसरी ओर, साहबगंज मंडी में हर माह करीब 10 करोड़ रुपये के नूडल्स, पास्ता, मैकरोनी और सॉस की बिक्री हो रही है। शहर में चटोरी गली, जीडीए के नए फूड स्ट्रीट और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के विस्तार ने इस कारोबार को और बढ़ावा दिया है।
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कोट
बाजार में बिकने वाले अधिकांश फास्ट फूड को बनाने में पाम ऑयल या मिलावटी तेल का इस्तेमाल किया जाता है। कई दुकानों पर एक ही तेल को बार-बार गर्म कर समोसा, पकौड़ी और जलेबी तली जाती है। इससे तेल में मौजूद पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और हानिकारक टॉक्सिक कंपाउंड बनने लगते हैं। लगातार ऐसे खाद्य पदार्थ के सेवन से लिवर, हृदय और पाचन तंत्र पर गंभीर असर पड़ता है। वहीं, नूडल्स और अन्य फास्ट फूड में इस्तेमाल होने वाला अजीनोमोटो व अत्यधिक सोडियम आंतों और लिवर को नुकसान पहुंचाता है।
-डाॅ. सौरभ केडिया, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, एम्स गोरखपुर
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