प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि जो खाते साइलेंट श्रेणी में डाले गए हैं, उन्हें अगर खाताधारक दोबारा शुरू कराना चाहता है, तो उन्हें केवाईसी भरनी होगी। साथ ही जरूरी प्रमाणपत्रों के साथ खाता फिर से शुरू करने के लिए प्रार्थना पत्र देना होगा। यदि खाताधारक के नामिनी आते हैं, तो उन्हें भी संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
वेलफेयर स्कीम में जमा करवाना होता है धन
12 साल तक खाताधारक का इंतजार किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी जाती है। मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद निष्क्रिय खातों की रकम वेलफेयर स्कीम के तहत सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है।
एक लाख से अधिक खातों की हुई है जांच
उधर, प्रधान डाकघर के अलावा तीन अन्य डाकघरों में वित्तीय गड़बड़ी सामने आने के बाद मामले की विभागीय जांच शुरू करा दी गई। एक साल तक चली जांच में कुल एक लाख से अधिक खातों की जांच की गई। इसमें 68 हजार खाते तो सिर्फ पेंशन के थे। इसके अलावा निष्क्रिय खाते, फर्जी नाम से इंट्री, खाते पर फर्जी एटीएम कार्ड जारी होने के साथ अन्य वित्तीय लेन-देन संबंधी मामलों की जांच की गई।