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त्योहार: हस्त नक्षत्र में शुक्ल योग से मंगलकारी होगी हरितालिका तीज, ऐसे प्रसन्न होंगे भगवान शिव व माता पार्वती

Tue, 07 Sep 2021 06:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

आस्था और विश्वास के साथ गुरुवार को मनाई जाएगी हरितालिका तीज, पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत, करेंगी भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा।
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हरितालिका तीज 2021 - फोटो : social media
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विस्तार
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भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (गुरुवार) को हरितालिका तीज मनाई जाएगी। सुहागिनें पति की लंबी उम्र की कामना के लिए निर्जल व्रत रख भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार नौ सितंबर को तृतीया तिथि का मान प्रात: तीन बजकर 59 मिनट से शुरू होकर संपूर्ण दिन और रात को दो बजकर 14 मिनट तक है। इस दिन हस्त नक्षत्र शाम पांच बजकर 14 मिनट तक और शुक्ल योग रात को 12 बजकर 19 मिनट तक है। हस्त नक्षत्र के साथ ही शुक्ल योग के संयोग से इस बार हरितालिका तीज मंगलकारी होगी।

शुक्र के स्वग्रही होने से तीज व्रत अत्यंत शुभ
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, सूर्य, बुध व शुक्र स्वगृही हैं। शनि स्वगृही होकर वक्री है। गुरु अतिगामी होकर वक्री है। केतु वृश्चिक राशि में और राहु वृषभ राशि में हैं। चंद्रमा हस्त नक्षत्र का होकर कन्या राशि में बुध एवं मंगल के साथ संयोग कर रहा है। ग्रहों की चाल के आधार पर हरितालिका तीज पर्व पर शुभ स्थिति बन रही है, खासकर शुक्र का स्वगृही होना। यह पति के स्वास्थ्य व दीर्घायु कामना के लिए अत्यंत शुभ है। सूर्य का स्वगृही होना शुभता को बढ़ा रहा है।

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हरितालिका तीज व्रत का महत्व

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। महिलाएं जिस त्याग-तपस्या से यह व्रत रखती हैं, वह बेहद अनुपम है। यह कठिन व्रत है। इस व्रत में फलाहार का सेवन तो दूर, सुहागिनें जल तक का सेवन नहीं करती हैं। व्रत के दूसरे दिन स्नान- पूजन के बाद व्रत का पारण किया जाता हैं।

ऐसे करें पूजा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, सुहागिनें सूर्योदय से पूर्व उठकर सरगी ग्रहण करें। स्नान के बाद शिव परिवार सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजन करें। दिनभर निर्जल व्रत रहते हुए शाम को पुन: स्नान कर सोलह शृंगार करें। पूजन के निमित केले के पते से मंडप बनाकर उसमे गौरी-शंकर और गणेशजी की मूर्ति या चित्रमयी प्रतिमा स्थापित करके पूजन करें। शिव के लिए नैवेद्य के साथ वस्त्र एवं माता पार्वती के लिए भोग पदार्थों के अतिरिक्त सुहाग की वस्तु अर्पित करें। शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनें। अगले दिन ब्राह्मणों को दान पुण्य कर व्रत का पारण करें।
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