ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। महिलाएं जिस त्याग-तपस्या से यह व्रत रखती हैं, वह बेहद अनुपम है। यह कठिन व्रत है। इस व्रत में फलाहार का सेवन तो दूर, सुहागिनें जल तक का सेवन नहीं करती हैं। व्रत के दूसरे दिन स्नान- पूजन के बाद व्रत का पारण किया जाता हैं।
ऐसे करें पूजा
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, सुहागिनें सूर्योदय से पूर्व उठकर सरगी ग्रहण करें। स्नान के बाद शिव परिवार सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजन करें। दिनभर निर्जल व्रत रहते हुए शाम को पुन: स्नान कर सोलह शृंगार करें। पूजन के निमित केले के पते से मंडप बनाकर उसमे गौरी-शंकर और गणेशजी की मूर्ति या चित्रमयी प्रतिमा स्थापित करके पूजन करें। शिव के लिए नैवेद्य के साथ वस्त्र एवं माता पार्वती के लिए भोग पदार्थों के अतिरिक्त सुहाग की वस्तु अर्पित करें। शिव-पार्वती के विवाह की कथा सुनें। अगले दिन ब्राह्मणों को दान पुण्य कर व्रत का पारण करें।