गोरखपुर। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर बृहस्पतिवार को हनुमान जयंती पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व है।
पंडित विकास मालवीय के अनुसार, हस्त नक्षत्र सायंकाल तक रहने और सुबह मेष लग्न का संयोग भी इसदिन को और अधिक शुभ बना रहा है। हनुमान जयंती के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। घर या मंदिर में हनुमान की प्रतिमा को लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित किया जाता है। धूप, दीप, फूल व नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इस अवसर पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामचरितमानस का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, हनुमान जी को भोग में चना, गुड़, बेसन के लड्डू, बूंदी और केला अर्पित किया जाता है, जिन्हें हनुमान जी का प्रिय माना गया है। मान्यता है कि चना और गुड़ बलवर्धक होते हैं, इसलिए यह भोग विशेष महत्व रखता है। हनुमान जयंती का पर्व शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।