हलहारिणी अमावस्या नौ जुलाई यानी आज मनाई जाएगी। आषाढ़ मास की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। इस समस्या को आषाढ़ी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किसानों द्वारा हल और खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। इसके साथ ही श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं।
आषाढ़ी अमावस्या का महत्व
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, इस तिथि पर किसान विधि-विधान से हल पूजन करके ईश्वर से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं। इसके साथ ही अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है। इसलिए पितरों के तर्पण के लिए आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चीटियों को शक्कर खिलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या घर मे ही स्नान करें। इसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। फिर विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान-पुण्य करें। अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण भी किया जा सकता है।