ऐसे मरीज झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, डॉक्टर से कराएं इलाज : डॉ. प्रभात
केस-एक
शाहपुर के रहने वाले मनीष सिंह को खुद से बात करने की आदत हो गई थी। परिजन परेशान होकर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग ले गए। जांच शुरू हुई तो पता चला की सिजोफ्रेनिया की दिक्कत है। धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
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केस-दो
बेतियाहाता के रहने वाले शिवम कुमार को अपनी परछाई से डर लगता था। उन्हें लगता था कि हर वक्त कोई उनका पीछा कर रहा है। परिजन इलाज के लिए शहर के एक मनोचिकित्सक के पास ले गए। जांच में सिजोफ्रेनिया की शिकायत मिली। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया है। अभी उनका फालोअप चल रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ये दो केस महज बानगी हैं। ऐसे सैकड़ों मामले हर दिन मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। वह भी केस बिगड़ने के काफी बाद। मरीजों को मामला भूत-पिशाच से जुड़ा लगता है। इसकी वजह से लोग झाड़-फूक के चक्कर में फंस जाते हैं। जब मामला अधिक बिगड़ जा रहा है, तो डॉक्टर के पास जा रहे हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में काफी समय लग रहा है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभात कुमार अग्रवाल ने बताया कि लोगों को खुद से बात करने की आदत, परछाई से डर, दूसरों पर हमेशा शक होता हो तो यह सिजोफ्रेनिया का लक्षण है। सिजोफ्रेनिया मानसिक बीमारी है। बताया कि सिजोफ्रेनिया के 90 से 100 मरीज हर माह इलाज के लिए आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के इलाज में थोड़ा समय लगता है, क्योंकि मानसिक रोग की दवा का असर धीरे-धीरे होता है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे मरीजों को शक और आवाज की वजह से नींद भी नहीं आती है। उसके अपने विचार उसे सुनाई देने लगते हैं। सामान्य तौर पर एक प्रतिशत लोगों में यह बीमारी होती है। इस बीमारी का इलाज पूरी तरह से संभव है। मरीजों को सलाह दी जा रही है की दिक्कत होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न फंसें। तत्काल डॉक्टर के पास जाएं।