गोरखपुर शहर में विकास की रफ्तार के साथ सबकुछ व्यवस्थित करना अब बड़ी चुनौती बन गई है। रुस्तमपुर, ट्रांसपोर्टनगर समेत कई जगहों पर ठेले वालों को जगह दी गई, ताकि वह व्यापार कर सके और जाम भी न लगे, लेकिन वह फिर बाहर आ जाते हैं।
बुधवार को एक बार फिर पुलिस ने रुस्तमपुर में ठेले वालों को आवंटित जगह में भेज दिया, लेकिन यह कवायद कितने दिन कारगर रहेगा, यह बड़ा सवाल है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह सोच है। लोगों को जब खुद सामान खरीदना होता है तो वह सड़क पर ही गाड़ी से लेना चाहते हैं, लेकिन जब वह खुद फंसते हैं तो दूसरों को जाम के लिए जिम्मेदार बताकर कोसते हैं।
सोच के साथ ही एक वजह वसूली भी है। इसे सह देने के पीछे तीन तरह के लोगों की अहम भूमिका होती है। पहला तो ठेले को अपने दुकान के सामने लगाने वाले दुकानदार की भूमिका होती है। वह हर ठेले से 100 से 200 रुपये लेता है।
इसके बाद नगर निगम ने कुछ कर्मचारी जो आंख मूंद लेते हैं, वह कैसे होता है, इसे हर कोई जानता है। रही सही कसर को पुलिस वाले पूरा कर देते हैं। उनका तर्क सीधा होता है कि ठेला हटाना उनका काम नहीं है, नगर निगम अतिक्रमण हटाने को जिम्मेदार है तो फिर महीने में अगर सब्जी-फल ही मिल जाए तो क्या नुकसान है।
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