गुरु पूर्णिमा का पर्व 24 जुलाई शनिवार को मनाया जाएगा। इस बार गुरु पूर्णिमा को तीन महत्वपूर्ण योग खास बना रहे हैं। इस दिन पूर्वाषाढ़ नक्षत्र दिन में एक बजकर 26 मिनट के बाद श्रवण नक्षत्र रहेगा। संपूर्ण दिन और रात्रि प्रीति योग एवं दिन मे एक बजकर 26 मिनट तक जय योग और उसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग है। इस दिन तीन महत्वपूर्ण योग घटित होने से इस आदि गुरु वेदव्यासजी की कृपा से श्रद्धाओं को समस्त कार्यो में सफलता की प्राप्ति होगी।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को आयोजित होता है। इस दिन वेदव्यासजी का जन्म हुआ था। इनको प्रथम गुरु की उपाधि प्रदान की गई है, क्योंकि ये मानव जाति के कल्याण के लिए वेदों का ज्ञान प्रदान किए थे।
गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें
पंडित शरद चंद्र मिश्रा के अनुसार, प्रातःकाल स्नान से निवृत होकर एक स्वच्छ आसन पर बैठ जाएं। वहां व्यासपीठ की स्थापना एक चौकी पर करें। उस पर अपने गुरुजी एवं व्यासजी और यदि संभव हो तो शुक्रदेव, सनातन धर्म के अभ्यदय में सहायक शंकराचार्य जी की भी प्रतिमा स्थापित करें। उसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर ‘गुरु परंपरा सिद्धयर्थं व्यास पूजनं करिष्ये’ उच्चारण कर संकल्प करें।
इसके बाद चंदन, रोली, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान, फल से पूजन करें। यदि मंत्र देने गुरुजी का आवास समीप हो तो उनके वहां जाकर उन्हें फल, मीठा और दक्षिणा अर्पित करें और उनका आशीर्वाद ग्रहण करें।